बुधवार, 05 सितंबर, 2007 को 07:08 GMT तक के समाचार
ख़बरें हैं कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से कहा है कि वो 2001 के वादे के अनुसार वापस पाकिस्तान न जाएँ.
नवाज़ शरीफ़ का 1999 में परवेज़ मुशर्रफ़ ने तख्ता पलट दिया था और उसके बाद 2001 में उन्हें निर्वासित कर दिया गया था.
हाल में उन्होंने 10 सितंबर को पाकिस्तान वापस लौटने की घोषणा की थी.
ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की ओर से सऊदी अरब सरकार के समक्ष कई बार दलीलें पेश की गईं हैं कि वह नवाज़ शरीफ़ की वापसी को रोके.
पाकिस्तान के अधिकारी इस बात के संकेत देते रहे हैं कि नवाज़ शरीफ़ के निर्वासन का फ़ैसला सऊदी अरब की मध्यस्थता से हुआ था.
सऊदी अरब की सरकारी एजेंसी ने मंगलवार को एक सरकारी प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि नवाज़ शरीफ़ को अपने वादे को पूरा करना चाहिए.
प्रवक्ता ने पाकिस्तानी मीडिया की उन ख़बरों का खंडन किया था जिसमें कहा गया था कि 'सऊदी अरब नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार के पाकिस्तान वापसी से संतुष्ट है और उसका समर्थन करता है.'
उसका कहना था कि सऊदी अरब सरकार 2001 में नवाज़ शरीफ़ को मानवीय आधार पर स्वीकार करने के लिए तैयार हो गई थी.
नवाज़ शरीफ़ की घोषणा
लंदन में संवाददाता सम्मेलन में नवाज़ शरीफ़ ने घोषणा की थी कि वो दस सितंबर को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर उतरेंगे और वहाँ से वह पंजाब जाएंगे.
नवाज़ शरीफ़ ने कहा, " इंशाअल्लाह दस सितंबर को हम इस्लामाबाद में क़दम रखेंगे और वहाँ से सड़क से लाहौर जाएंगे."
उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के इरादों को चुनौती देंगे.
नवाज़ शरीफ़ के स्वदेश लौटने पर उनकी गिरफ़्तारी की भी संभावना जताई जा रही है.
हालांकि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फ़ैसला देते हुए कहा था कि नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ को स्वदेश आने और एक नागरिक के रूप में देश में रहने का पूरा अधिकार है.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति पद के लिए अक्तूबर में होने वाले चुनाव में फिर से जीत हासिल करना चाहते हैं और वो नहीं चाहते कि नवाज़ शरीफ़ वापस लौटें.
वो पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो से हाथ मिलाने की कोशिश कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में संसदीय चुनाव भी साल के अंत तक प्रस्तावित हैं.