बुधवार, 05 सितंबर, 2007 को 12:28 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीसीसी संवादददाता, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा से पूर्वांचल के बलिया तक आठ लेन के एक्सप्रेस-वे की महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की है.
गंगा एक्सप्रेस-वे नामक इस एक्सप्रेस-वे पर पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे गंगा घाटी की पारिस्थितिकी पर असर पड़ेगा.
मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि इस परियोजना पर लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपए की लागत आएगी.
इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निकट ग्रेटर नोएडा से लेकर बलिया तक गंगा नदी के किनारे लगभग 1000 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग तैयार होगा.
ऐतिहासिक परियोजना
भारत में ग्रैंड-ट्रंक यानी जीटी रोड के बाद संभवत यह दूसरी सबसे बड़ी सड़क परियोजना होगी.
जब जीटी रोड बनी थी तब वह कोलकाता से पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती थी. इसे सोलहवीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी ने बनवाया था.
उम्मीद है कि 100 मीटर चौड़ा आठ लेन का यह सड़क मार्ग बनने से इसके किनारे औद्योगिक नगर और व्यावसायिक परिसर बनेंगे.
मायावती ने कहा कि नए सड़क मार्ग से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास में तेज़ी आएगी.
औद्योगिक विकास की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का पूर्वी इलाका काफ़ी पिछड़ा हुआ है.
आशंकाएँ
हालाँकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर कुछ आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं.
कहा जा रहा है कि इससे गंगा में प्रवाहित होने वाले पानी का बहाव प्रभावित होगा. गंगा उत्तर भारत की प्रमुख नदी है, जिसमें कई छोटी-बड़ी नदियां मिलती हैं.
हालाँकि उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर ने भरोसा दिलाया है कि निकासी व्यवस्था का पूरा ख़्याल रखा जाएगा ताकि बाढ़ और पानी के जमाव जैसी समस्याओं से बचा जा सके.
लेकिन एक्सप्रेस-वे के निर्माण को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि इस परियोजना का पर्यावरण पर विपरीत असर होगा.
लखनऊ विश्वविद्यालय के भूगोल के प्रोफेसर हीरालाल यादव कहते हैं, "निश्चित रूप से पर्यावरण पर इसका असर पड़ेगा. मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होगी और जाहिर सी बात है फसल उत्पादन पर भी असर पड़ेगा."