सोमवार, 03 सितंबर, 2007 को 23:20 GMT तक के समाचार
मोहनलाल शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
वाम दलों के विरोध के बीच बंगाल की खाड़ी में मंगलवार से भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का साझा नौसैनिक अभ्यास शुरू हो रहा है.
नौसैनिक अभ्यास में अमरीका के दो विमानवाही पोत और 11 अन्य जलपोत हिस्सा ले रहे हैं. इसमें सिंगापुर की भी सीमित भागीदारी होगी.
भारत, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल मई में रणनीतिक साझीदारी के तहत नए समूह (क्वाड) का गठन किया था.
कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन की बढ़ती हुई ताकत को देखते हुए यह रणनीतिक गठजोड़ किया गया है.
नौसैनिक अभ्यास पर वाम दलों की आपत्ति का मुख्य कारण इसमें अमरीका का शामिल होना है.
लगभग एक हफ़्ते तक चलने वाले इस नौसैनिक अभ्यास के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीआई के नेता एबी बर्धन कोलकाता से अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे और वो उड़ीसा होते हुए आठ सितंबर को विशाखापत्तनम पहुंचेंगे.
रास्ते में जगह-जगह पर रैलियाँ होंगी और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. कोलकाता में इस रैली को ज्योति बसु झंडा दिखा कर रवाना करेंगे.
इसी तरह चेन्नई में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम के नेता प्रकाश कारत विरोध की कमान संभालेंगे.
विरोध
इस तरह के नौसैनिक अभ्यास पहले भी होते रहे हैं तो इस बार विरोध क्यों. इस पर सीपीआई के नेता अतुल कुमार अंजान का कहना है, “कौन सा अमरीका का हित है जो वह 20 हज़ार किलोमीटर दूर से आकर सैनिक अभ्यास कर रहा है. भारत को किससे ख़तरा है. यहाँ नए लोगों को चौधरी बनाया जा रहा है. ये सब आने वाले समय में विदेश नीति को पलीता लगा कर हमारे मुहाने पर अमरीकी सेना को खड़ा करने की कोशिश है.”
वाम दलों का कहना है कि उनकी अमरीका से कोई शत्रुता नहीं है और उनका विरोध अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों से है.
उधर भारत-अमरीका परमाणु संधि के कई विंदुओं का विरोध कर रही विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि वो सिर्फ़ राष्ट्रीय हितों का ख़याल रखती है.
भाजपा प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी कहते हैं, “वाम दलों का विरोध वही जानें. लागातार इस तरह की प्रक्रिया चलती रही है. यह कोई नई चीज नहीं है. हमारे लिए सर्वोपरि है भारतीय हित. अगर भारतीय हितों का नुक़सान नहीं है तो हम उसके विरोध में नहीं हैं.”