रविवार, 02 सितंबर, 2007 को 17:37 GMT तक के समाचार
वाम दलों ने परमाणु समझौते पर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इसके क्रियान्वयन की दिशा में क़दम बढ़ाए गए तो सरकार को संकट का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों की ओर से ताज़ा चेतावनी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पार्टी सदस्यों के नाम चिट्ठी के बाद आई है. इस चिट्ठी में उन्होंने अमरीका के साथ परमाणु समझौते को ऐतिहासिक करार दिया है.
हालाँकि वाम दलों के साथ उपजे मतभेद को दूर करने के लिए एक समिति गठित करने पर सहमति बन चुकी है और समिति में कौन-कौन शामिल होंगे इसके बारे में अगले कुछ दिनों में ही फ़ैसला होना है.
वाम दलों के साथ बैठक के बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि प्रस्तावित समिति की सिफ़ारिशों को परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के समय ध्यान में रखा जाएगा.
लेकिन कांग्रेस सदस्यों को सोनिया गांधी के संदेश के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने रविवार को कहा, "अब यह सरकार तय करे कि वो संकट में फँसना चाहती है या नहीं. हम पहले ही कह चुके हैं कि समिति की सिफ़ारिशें आने तक समझौते का क्रियान्वयन नहीं किया जाए."
कोलकाता में जब पत्रकारों ने येचुरी से सोनिया गांधी की चिट्ठी के बारे में पूछा तो उनका कहना था, "यह चिट्ठी बीस दिन पुरानी है. तब से अब तक स्थितियाँ काफी बदल चुकी है."
उनका कहना था, "सरकार पर वैसे कोई संकट नहीं है बशर्ते समझौते को लागू करने कि दिशा में न बढ़ा जाए."
येचुरी ने ये भी कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की इसी माह होने वाली बैठक में भारतीय परमाणु रिएक्टरों की निगरानी से संबंधित प्रस्तावित समझौते पर बातचीत नहीं होगी.
उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने सोनिया गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम इसे स्वीकार नहीं करते. परमाणु समझौते को इस तरह का प्रमाणपत्र देना ठीक नहीं है."