शनिवार, 01 सितंबर, 2007 को 06:17 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के लापता 100 सैनिकों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है. सेना के मुताबिक वे सुरक्षित हैं पर तालेबान उन्हें अगवा करने का दावा कर रहे हैं.
स्थिति यह है कि दोनों ओर से आ रहे परस्पर विरोधाभासी बयानों के बीच यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि लापता सैनिक कहाँ पर और किस हाल में हैं.
पिछले दिनों दक्षिणी वज़ीरिस्तान के तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने दावा किया था कि उन्होंने 300 पाकिस्तानी लोगों को बंदी बना रखा है.
दूसरी ओर सेना इस दावे को ग़लत बताती आ रही है और सेना के हवाले से बताया गया था कि लगभग सौ सैनिकों का एक कारवां कुछ समय के लिए संपर्क से बाहर था पर अब वे सुरक्षित पाए गए हैं.
पर सेना के एक प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि लगभग 100 सैनिक तालेबान समर्थकों और पाकिस्तान सरकार समर्थक कबायली लोगों के बीच हो रहे संघर्ष में फंसे हुए हैं.
इससे पहले जानकारी दी गई थी कि ये सैनिक दक्षिणी वजीरिस्तान के वाना और लाधा इलाकों के बीच सफ़र कर रहे थे जब उनसे संपर्क टूट गया था.
मेजर जनरल वहीद अरशद ने शुरुआत में जानकारी देते हुए कहा था कि उनके सैनिक ख़राब मौसम में फंसे हुए हैं और उन्होंने कहीं पर शरण ले रखी है पर बाद में कहा गया कि ये सैनिक संघर्ष में फंसे हुए हैं.
विरोधाभास
सेना की ओर से बदलकर सामने आ रहे इन बयानों की वजह से इन सैनिकों की स्थिति को लेकर एक तरह का भ्रम पैदा हो गया है.
इस बारे में बीबीसी के जाफ़र रिज़वी ने तालेबान मामलों के विशेषज्ञ, पत्रकार रहीमुल्लाह यूसुफ़ ज़ई से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि जिस तरह की जानकारी आ रही हैं उससे ऐसा कम ही लगता है कि ये सैनिक ख़राब मौसम में कहीं फंसे हुए हैं.
उन्होंने कहा, "जिस इलाके में सैनिक लापता हुए हैं, वहाँ के क़रीब 80 कबायली लोगों को सेना ने हिरासत में ले लिया है. अगर सैनिक अगवा नहीं हुए हैं तो इन्हें हिरासत में लेने की क्या ज़रूरत थी. सरकार को चाहिए कि जिरगा के ज़रिए हल निकालने की कोशिश करे."
बीबीसी के पूछने पर सेना के प्रवक्ता ने यह तो स्वीकारा कि उनके सैनिक इस इलाके में फंसे हुए हैं और जिरगा के ज़रिए किसी हल को निकाला जा सकता है पर इस बात को मानने से इनकार किया कि सैनिक अगवा कर लिए गए हैं.
सेना प्रवक्ता यह भी नहीं बता सके कि क्या उनका इन सैनिकों से कोई सीधा संपर्क है और यही दोहराते रहे कि उनके बारे में रिपोर्ट मिल रही है.
एक चरमपंथी गुट ने दावा किया है कि उन्होंने सैनिकों को बंदी बना लिया है क्योंकि सरकार शांति समझौते का पालन नहीं कर रही है.
उल्लेखनीय है कि क़बायली नेताओं और सरकार के बीच हुए शांति समझौते के टूट जाने के बाद से उस क्षेत्र में हिंसक घटनाएँ बढ़ी हैं. पिछले कुछ महीनों में कम से कम 60 सैनिक और 250 चरमपंथी मारे गए हैं.