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शनिवार, 01 सितंबर, 2007 को 18:28 GMT तक के समाचार

श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

जाति पंचायत का दकियानूसी फ़ैसला

पवन पिछले चार दिन से अपने दुधमुंहे बच्चे के लिए तड़प रहा है जिसे जाति पंचायत के फ़ैसले के तहत उनसे छीन लिया गया. तब ये बच्चा सिर्फ़ छह दिन का था.

पंचायत के आदेश के अनुसार उनकी पत्नी कविता को भी उनकी माँ के पास भेज दिया गया है. पंचायत का आदेश है कि पवन और कविता अब भाई-बहन का रिश्ता रखेंगे.

पवन और कविता का क़सूर सिर्फ़ इतना है कि दोनों ने एक ही गोत्र होने के बावजूद प्यार किया और शादी कर ली.

अफ़सोस की बात ये है कि उच्च अधिकारियों से मिलने के बावजूद पवन को कोई राहत नहीं मिली है.

पवन का कहना है, “मुझे तो ये ही पता नही चल पा रहा है कि मेरा बच्चा है कहाँ, मुझे डर है कि कहीं पंचायत सदस्य मेरे बच्चे के साथ कुछ ऐसा वैसा ना कर दें.”

पवन और कविता की साल भर पहले शादी हुई थी और तब से ये दोनो मुंबई मे रह रहे थे. कविता के गर्भवती होने के बाद कुछ दिन पहले पवन उसे लेकर गाँव आया था.

पंचायत के क्रूर और शर्मनाक फ़ैसले के अनुसार पवन पर 65 हज़ार रूपए का जुर्माना भी ठोका गया है लेकिन उससे भी शर्मनाक बात ये है की प्रशासन ने पंचायत के फ़ैसले के शिकार परिवार को किसी तरह की सुरक्षा देने के लिए कोई क़दम नही उठाया है.

फ़रियाद

पवन बताते हैं, “मैनें उपायुक्त और पुलिस से बात की है, उन्हें कहा है कि मुझे मेरा बच्चा और पत्नी दिलाई जाए और पंचायत ने जो जुर्माना मेरे उपर किया है उसका भी कुछ किया जाए, मुझे न्याय दिलाया जाए. मेरे साथ अन्याय हो रहा है.”

हद तो ये है की हरियाणा की बाल और महिला विकास मंत्री करतारी देवी जाति पंचायत के फ़ैसले पर क़ानूनी क़दम उठाने की बज़ाए इस फ़ैसले को एक हद तक सही ठहरा रही हैं.

वो कहती हैं, “परंपरा के अनुसार एक ही गोत्र मे शादी नहीं की जा सकती, स्थानीय परंपराओं के अनुसार अगर कोई ऐसा करता है तो वह ग़लत है.”

जब उन्हें ये याद दिलाया गया की वो मंत्री हैं और उन्होंने संविधान की शपथ ली है तो उनका कहना था. “मै पुरानी पंरपराओं मे विश्वास रखती हूँ, यहाँ ऐसा नहीं होता. विदेशों की बात और है वहाँ तो कोई किसी से भी शादी कर सकता है.”

जाति पंचायत का ये पहला फ़ैसला नही है जब पति-पत्नी को भाई-बहन की तरह से रहने का आदेश दिया गया है. ये घटनाएँ हरियाणा में आम हैं. लेकिन अफ़सोस की बात ये है की कभी किसी सरकार या राजनीतिक पार्टी ने इन जाति पंचायतों पर लगाम कसने की कोशिश नहीं की बल्कि परोक्ष रूप से इन पंचायतों को राजनीतिक पार्टियों का संरक्षण मिलता रहा है.

लगभग हर पार्टी के बड़े से बड़े नेता इन जाति पंचायतों के कार्यक्रमों मे हिस्सा लेने मे कोई झिझक नही दिखाते हैं.