शनिवार, 01 सितंबर, 2007 को 18:01 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ सत्ता बटवारे के बारे में उनका अभी कोई समझौता नहीं हुआ है लेकिन वह बहुत जल्द स्वदेश लौटने की योजना बना रही हैं.
शनिवार को लंदन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बेनज़ीर भुट्टो ने कहा, "मैं बहुत जल्द पाकिस्तान लौटने वाली हूँ."
भुट्टो ने कहा कि उनके पाकिस्तान जाने की तारीख़ के बारें में जल्द ही कोई घोषणा उनकी पार्टी 14 सितंबर को पाकिस्तान में करेगी.
ग़ौरतलब है कि एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने भी गत सप्ताह गुरूवार को ऐलान किया था कि वह दस सितंबर को पाकिस्तान लौटेंगे और परवेज़ मुशर्रफ़ को सत्ता से हटाने का अभियान शुरू करेंगे.
इस तरह की ख़बरें चल रही थीं कि परवेज़ मुशर्रफ़ और बेनज़ीर भुट्टो के बीच कोई इस तरह का समझौता हुआ था जिसके तहत मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे और बेनज़ीर भुट्टो प्रधानमंत्री बनने के लिए वापिस लौटेंगी.
बेनज़ीर भुट्टों के सूत्रों की तरफ़ से पिछले सप्ताह ऐसी ख़बरें आने लगी थीं कि ऐसे किसी समझौते पर बस दस्तख़त होने ही वाले हैं लेकिन परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रवक्ता ने कहा था राष्ट्रपति ने सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया है.
बेनज़ीर भुट्टो ने शनिवार को लंदन में कहा कि सत्ता बँटवारे के बारे में परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ समझौते के बारे में अस्सी प्रतिशत बातचीत कामयाब हो चुकी थी लेकिन आख़िरकार यह समझौता नहीं हो सका है.
यह पूछे जाने पर कि किस मुद्दे पर विचार करना बाक़ी रह गया था, बेनज़ीर भुट्टो ने कहा, "संसद की संप्रभुता और राष्ट्रपति तथा संसदीय चुनावों से संबंधित कुछ मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन सकी."
इस्लामाबाद में सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसियों से कहा कि भुट्टो की माँग थी कि परवेज़ मुशर्रफ़ से चुनाव कराने से पहले अपनी सैन्य वर्दी त्याग दें, संसद को भंग करने के अपने अधिकार छोड़ दें और प्रधानमंत्री पद पर किसी नेता को तीसरे कार्यकाल की भी इजाज़त दें.
एक कैबिनेट मंत्री ने एजेंसियों को बताया कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) ने परवेज़ मुशर्रफ़ से कहा है कि वह ऐसी किसी माँग पर सहमत ना हों जिससे भुट्टो या नवाज़ शरीफ़ तीसरी बार प्रधानमंत्री बन सकें.
अगर परवेज़ मुशर्रफ़ सत्ता में भुट्टो की वापसी की संभावना बनाते तो उन्हें संविधान में संशोधन करना पड़ता और कोई भी संशोधन करने के लिए दो तिहाई बहुमत ज़रूरी है.