शुक्रवार, 31 अगस्त, 2007 को 09:49 GMT तक के समाचार
बिहार में सिवान से राष्ट्रीय जनता दल सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को पुलिस अधीक्षक पर जानलेवा हमला करने के मामले में दस साल की सज़ा सुनाई गई है.
ज़िला अदालत में शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ यह मामला चल रहा था जिसमें उन्हें सज़ा सुनाई गई.
सरकारी वकील ने बताया कि 1996 में शहाबुद्दीन ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एसके सिंघल पर जानलेवा हमला किया था और प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल किया था.
उन्होंने बताया कि इन आरोपों के साबित होने के बाद उन्हें सज़ा सुनाई गई है. शहाबुद्दीन को पिछले छह महीने में चौथी बार किसी मामले में सज़ा सुनाई गई है.
जज ज्ञानेश्वर प्रसाद ने शहाबुद्दीन को 1996 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिंघल पर हमले के मामले में गुरुवार को दोषी ठहराया था.
न्यायाधीश ने सिंघल पर हमले के मामले में शहाबुद्दीन के अंगरक्षक को भी दोषी ठहराया. शहाबुद्दीन उस समय विधायक थे और उन्हें अंगरक्षक मिले हुए थे.
घटना के अनुसार उस समय एक गाँव में तनाव की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक सिंघल वहाँ गए थे. जब वो सिवान वापस लौट रहे थे तो उन्होंने कुछ हथियारबंद लोगों को खडे़ देखा.
उन लोगों ने जब पुलिसकर्मियों को अपनी ओर आते हुए देखा तो वे भागने लगे. इस पर पुलिसकर्मियों ने उनका पीछा किया.
घटना
उसी समय शहाबुद्दीन अपने समर्थकों के साथ वहाँ पहुँच गए और उन्होंने सिंघल पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं, हालाँकि इस हमले में सिंघल बाल-बाल बच गए थे.
इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के कार्यकर्ता छोटे लाल गुप्ता के अपहरण और हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.
मार्च में उन्हें सिवान में 1998 में सीपीआई-एमएल कार्यालय पर हमला करने और कार्यालय सचिव के अपहरण और पिटाई के मामले में दो वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी.
शहाबुद्दीन को हाल ही में चोरी के वाहन के एक मामले में तीन वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी. शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ हत्या और अन्य आपराधिक मामलों के लगभग 30 मामले चल रहे हैं.
शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ हत्या, हत्या का प्रयास, अवैध विदेशी हथियार रखने, विदेशी मुद्रा और वन्यजीव क़ानून के उल्लंघन समेत 30 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं.