गुरुवार, 30 अगस्त, 2007 को 06:31 GMT तक के समाचार
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेज़ीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म कराए.
इसके तुरंत बाद केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री अंबुमणि रामदॉस ने चेतावनी जारी कर दी कि यदि डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल ख़त्म नहीं की तो उनको बर्खास्त कर दिया जाएगा.
इस निर्देश और चेतावनी के बाद एम्स के रेज़ीडेंट डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी है.
हालांकि डॉक्टरों ने कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रामदॉस का विरोध जारी रहेगा और यदि वे दीक्षांत समारोह में आए तो डॉक्टर उनके हाथों से डिग्री लेने की जगह इस समारोह का बहिष्कार करेंगे.
उल्लेखनीय है कि रेज़ीडेंट डॉक्टर डिग्री सर्टिफ़िकेट की मांग को लेकर मंगलवार को हड़ताल पर चले गए थे.
और डिग्री इसलिए नहीं मिल पा रही थी क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी डिग्री पर स्वास्थ्य मंत्री का हस्ताक्षर न होने से भी काम चल जाएगा और उनकी जगह एम्स के दूसरे अधिकारी हस्ताक्षर कर सकते हैं.
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
गुरुवार को हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती तो अदालत शुक्रवार को इस मामले में हस्तक्षेप करेगी.
न्यायमूर्ति एमके शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव ख़न्ना की खंडपीठ ने कहा, “हमें इस मामले की जानकारी है और हम हड़ताल से चिंतित हैं. सरकार को इस मामले का हल जल्द निकालना चाहिए, क्योंकि इससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है.”
खंडपीठ ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को सर्टिफ़िकेट देने से इनकार नहीं कर सकती. कोर्ट ने कहा, “अगर केंद्र आज इस मामले को सुलझा लेता है तो ठीक है, लेकिन अगर विफल रहता है तो हमें कार्रवाई करनी होगी.”
अदालत ने ये निर्देश तब दिए जब एक वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि एम्स में चल रही रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हड़ताल
लगभग 700 रेज़ीडेंट डॉक्टर मंगलवार की शाम से हड़ताल पर थे.
दरअसल आयुर्विज्ञान संस्थान की डिग्री पर रजिस्ट्रार, डीन, निदेशक और अध्यक्ष चार लोगों के हस्ताक्षर होते हैं. इन सबके हस्ताक्षर होने पर ही एमबीबीएस और अन्य डिग्रियाँ मिलती हैं.
आयुर्विज्ञान संस्थान का अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री होता है, इस नाते अंबुमणि रामदॉस इसके अध्यक्ष हैं.
रेज़ीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना कि पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य मंत्री के दस्तख़त न होने के कारण डिग्रियाँ नहीं मिल पा रही हैं.
डॉक्टर हर्षवर्धन के अनुसार वे स्वास्थ्य मंत्री से भी मिल चुके थे लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. डिग्री न मिलने के कारण कई डॉक्टर किसी अन्य जगह नौकरी भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं.
हड़ताल ख़त्म करने की घोषणा करते हुए डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि डिग्रियों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के हस्ताक्षर की ज़रुरत नहीं है.