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गुरुवार, 30 अगस्त, 2007 को 15:34 GMT तक के समाचार

पीएम तिवारी
कोलकाता से

न उम्र की सीमा, न रोज़गार का बंधन

यह प्रेम कहानी पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले के रानीगंज में चल रहे ओलंपिक सर्कस की हथिनी सावित्री और एक जंगली हाथी की है.

यह जंगली हाथी घूमता-घामता वहाँ पहुँचा जहाँ ओलंपिक सर्कस के ख़ेमे गड़े हुए थे.

छब्बीस साल के इस हाथी की नज़रें तीस साल की हथिनी सावित्री से मिलीं, आँखों ही आँखों में बात हुई और सावित्री सारी मर्यादा तोड़ कर हाथी के साथ हो ली.

इस घटना ने सर्कस वालों के अलावा स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है.

कल से ही दोनों हाथी रात को जंगल में रहते हैं और दिन के समय रानीगंज के पास एक तालाब में अठखेलियां कर रहे हैं. गुरुवार को पूरे दिन वे शहर में घूमते रहे और उसके बाद कुछ देर पानी में रहे.

वन विभाग ने सावित्री को पकड़ने से इनकार करते हुए कहा है कि ऐसा होने पर उसका प्रेमी पूरे इलाके में भारी तोड़फोड़ मचा सकता है.

मौज मस्ती

उसके बाद दोनों हाथी सर्कस से निकल कर जंगल में चले गए. ओलंपिक सर्कस के अनुभवी मैनेजर चंद्रनाथ बनर्जी कहते हैं कि "सावित्री हमारे पास लंबे अरसे से थी लेकिन मेरे जीवन में पहली बार ऐसी घटना हुई है."

वे कहते हैं कि "सावित्री के जाने से सर्कस की रौनक़ तो कम हो ही गई है, चार लाख रुपये का नुकसान भी हो गया है. उसे चार लाख में खरीदा गया था."

सावित्री के जाने के बाद ओलंपिक सर्कस में हाथियों का शो बंद हो गया है. इसकी वजह यह है कि वहाँ सावित्री की तीन सहेलियाँ- चंपा, सीता और बिजली ने उसके जाने के ग़म में करतब दिखाने से इनकार कर दिया है. वे तीनों खाना भी नहीं खा रही हैं.

रिंग मास्टर सदानंद पांडे कहते हैं कि "सावित्री ऐसी नहीं थी. वह तो काफी होशियार और प्रशिक्षित थी. लेकिन सही कहा जाता है कि प्रेम के आगे किसी का वश नहीं चलता और इसमें उम्र आड़े नहीं आती. तभी तो वह अपने से चार साल छोटे हाथी के साथ चली गई."

वन विभाग के अधिकारी जीवन दफ़ादार कहते हैं कि "यह हाथियों के मिलन का मौसम है और बीच में बाधा पहुंचाने पर वे काफी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं."

यह प्रेम कहानी इलाके के लोगों के लिए जहां कौतुहल का विषय बनी है, वहीं सर्कस प्रबंधन मना रहा है कि सावित्री की यह प्रेम कहानी ज्यादा लंबी नहीं चले और वह जल्दी ही सर्कस में लौट आए.