गुरुवार, 30 अगस्त, 2007 को 11:14 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता
अमरीका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर ने कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें पूर्वोत्तर भारत के सुदूर कोने में रहने वाले जनजातीय लोग सम्मानित करेंगे.
मेघालय में बसने वाली खासी जनजाति ने उन्हें जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए सम्मानित करने का फ़ैसला किया है.
खासी पंचायत के नेताओं ने उन्हें ग्रासरूट डेमोक्रेसी अवार्ड देने की घोषणा की है.
अल गोर की प्रवक्ता ने कहा कि यह समाचार सुनकर पूर्व उप राष्ट्रपति काफ़ी अभिभूत हो गए हैं.प्रवक्ता ने कहा कि अभी तय नहीं है कि वे सम्मान लेने मेघालय जा सकेंगे या नहीं.
खासी जनजाति पंचायत का कहना है कि वे अल गोर की डाक्युमेंट्री 'द इनकन्विनिएंट ट्रुथ' से बहुत प्रभावित हुए हैं और उसे सम्मानित करना चाहते हैं क्योंकि उसमें ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को बहुत अच्छी तरह समझाया गया है.
यह सम्मान दरबार री यानी जनता की संसद में छह अक्तूबर को प्रदान किया जाएगा, इसका आयोजन उस जंगल में किया जाएगा जिसे खासी जनजाति पवित्र मानती है और उसे 700 वर्षों से पूरी तरह सुरक्षित रखा है. सम्मान के रूप में स्थानीय कलाकृतियाँ और 'मामूली धनराशि' भेंट की जाएगी.
इस आयोजन से जुड़े रॉबर्ट खारशिंग ने कहा, "हमें आशा है कि अल गोर की वजह से दुनिया का ध्यान हमारे मुद्दों की ओर जाएगा."
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, मेघालय में चेरापूंजी और भावासिनराम दुनिया में सबसे अधिक बारिश वाले स्थानों में हैं लेकिन अब वहाँ बारिश कम होती जा रही है.
इसका बुरा परिणाम यहाँ के पर्यावरण संतुलन पर पड़ रहा है, खासी जनजाति के लोगों का कहना है कि यह सब जंगलों की अंधाधुंध की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो रहा है.
उनका कहना है कि मेघालय यानी मेघों का घर उनके राज्य का नाम है लेकिन अगर यही हालत रही तो वह नाम का ही मेघालय रह जाएगा इसलिए वे जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं.