बुधवार, 29 अगस्त, 2007 को 09:57 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार में भागलपुर शहर के नाथनगर मोहल्ले का एक युवक किसी महिला के गले से सोने की चेन छीनकर भागते समय रंगे हाथों पकड़ा गया.
फिर तो 'चोर है, उचक्का है, मारो-मारो' का शोर मचाती हुई भीड़ ने उस युवक को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया.
लात-घूँसा-जूता-चप्पल-लाठी-बेल्ट की जो बेरहम बरसात उस युवक के नंगे बदन पर हो रही थी, उसे 'नायाब नज़ारा' मानने वाले वीडियो कैमरे वहाँ चालू थे.
इस बीच जब दो पुलिसकर्मी उस भीड़ में जा घुसे तो नज़ारा और भी आक्रामक और कैमरों के लिए 'मसालेदार' बन गया.
फिर तो उस 'उचक्के' के पाँव में रस्सी बाँधी गई. रस्सी का दूसरा छोर पकड़कर एक पुलिस वाला मोटर साइकिल पर बैठ गया और दूसरा पुलिस वाला मोटर साइकिल चलाने लगा.
लहू-लुहान शरीर को सड़क से रगड़े जाने और इस वजह से उस घायल आदमी के चीखने-चिल्लाने की 'शूटिंग' जैसा समाँ बँध गया था वहाँ.
मानवाधिकार को तार-तार करने की इस फ़िल्मी अंदाज़ वाली करतूत में पुलिस और नागरिक, दोनों पक्षों के कुछ 'बहादुर' शरीक थे.
कार्रवाई
और जब ये 'ब्रेकिंग न्यूज़' टेवीविज़न के पर्दे पर बार-बार चीत्कारने लगी तो राज्य की नीतीश कुमार सरकार के ख़िलाफ़ विपक्षी नेता भी दहाड़ने लगे.
मामला गंभीर समझ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फौरन कार्रवाई का आदेश अपने अधिकारियों को दिया.
तभी राज्य के गृह सचिव अफ़ज़ल अमानुल्लाह का बयान आया कि संबंधित दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित करके भागलपुर से हटा दिया गया और उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हो गया है.
लेकिन पुलिस के बचाव में और मीडिया के कथित 'अति प्रचारी प्रवृत्ति' के विरोध में एक दूसरी कहानी भी सरकारी बाबुओं ने ज़ोर-शोर से चलाई.
वो कहानी ये है कि पुलिस वाले तो जनता की जानलेवा पिटाई से उस 'चोर' को बचाने के लिए उसे मोटर साइकिल पर बैठाकर भगा ले जा रहे थे.
लेकिन वह 'चोर' मोटर साइकिल से जब गिर गया तो कुछ दूर घसीटे जाने के दृश्य को मीडियावालों के कैमरों ने बहुत बढ़ा-चढ़ा पेश कर दिया.
प्रतिक्रिया
अब इस ख़बर पर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया देखिए कि उन्होंने इसे धर्मविशेष के एक युवक पर ज़्यादती का मामला माना और नाथनगर पुलिस थाने पर लोगों की भीड़ ने पथराव कर दिया.
पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में कई लोगों को घायल कर दिया. गनीमत समझिए कि भागलपुर के लोगों ने 18 साल पहले की भूल नहीं दोहराई, जब वहाँ भीषण दंगे भड़के थे.
अब जो ऐसे मामलों में होता आया है, वही हो रहा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य पुलिस प्रशासन से इस बारे में जवाब तलब किया है.
सत्ता पक्ष और विरोध पक्ष के नेताओं को एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का मौक़ा हाथ लगा है.
कुछ लोग इसी बहाने किसी को भड़काने या अपने पक्ष में कुछ भुना लेने में जुट गए हैं.