मंगलवार, 28 अगस्त, 2007 को 12:08 GMT तक के समाचार
अरविंद आराध्य
रियलिटी शो विजेता
ब्रिटेन की वॉरिक यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का मौका देने वाले एक भारतीय टेलीविज़न रियलिटी शो में जब मैंने हिस्सा लेने का फ़ैसला किया था तो कभी नहीं सोचा था कि मैं इसका विजेता बनूँगा.
कई इंजीनियरिंग कॉलेजों की परीक्षा देने के बाद यूँ ही घर में खाली बैठा था, सो सोचा कि समय बिताने के लिए ये अच्छा है और मौका गँवाना नहीं चाहिए.
शुरु का ऑनलाइन टेस्ट कमोबेश आसान रहा लेकिन असली चुनौती इंटरव्यू राउंड से शुरू हुई. और फिर मीडिया के सामने इतने बड़े स्तर पर आने का भी ये मेरा पहला अनुभव था.
फ़ाइनल राउंड में तनाव इतना था कि बयां करना मुश्किल है. इस बात पर यक़ीन करने में थोड़ा समय लगा कि मैंने रियलिटी शो जीत लिया है.
इससे मेरे आत्मविश्वास को बहुत बल मिला है क्योंकि अगर वॉरिक यूनिवर्सिटी ने मुझे अस्सी हज़ार पाउंड यानी 64 लाख रुपए की छात्रवृत्ति देने का फ़ैसला किया है तो ज़रूर कोई वाजिब वजह होगी.
चाँद पर होने का एहसास
जीवन में इतना बेहतरीन मौका मिलने से ऐसा महसूस हो रहा है मानो मैं चाँद पर हूँ. चाँद पर हूँ...ये वाक्य मैं यूँ ही नहीं कह रहा. मेरे लिए इसके खा़स मायने हैं क्योंकि मैं अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता हूँ.
अकसर सवाल उठता है कि भारत के बजाय विदेश में जाकर पढ़ाई क्यों. मुझे विदेश में जाकर पढ़ाई करने का विचार इसलिए अच्छा लगा क्योंकि वहाँ पढ़ाई के प्रति पूरा नज़रिया ही अलग है.
इसमें कोई शक नहीं है कि अगर मुझे ये छात्रवृत्ति मिली है तो भारतीय शिक्षा प्रणाली के चलते ही और मैं इसका सम्मान करता हूँ.
लेकिन मुझे ये भी लगा कि वॉरिक जैसी विदेशी यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई बहुत व्यावहारिक है. जिस दिशा में मैं बढ़ना चाहता हूँ उसमें अध्ययन और शोध की सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तथ्यों को जानने-समझने का मौका मिलना बहुत ज़रूरी है जो मुझे यहाँ मिलेगा.
जहाँ तक बात पढ़ाई के बाद विदेश से भारत वापस आकर काम करने की है, तो मेरी राय थोड़ी अलग है. मुझे अंतरिक्ष यात्री बनना है और मेरा ये लक्ष्य मुझे जहाँ ले जाएगा, मैं जाउँगा.
मैं देशभक्त हूँ और चाहूँगा कि मेरा सपना अपने देश के ज़रिए ही पूरा हो. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान में काफ़ी काम हो रहा है और किसे पता मेरा सपना इसरो के ज़रिए ही पूरा हो- ‘ भारतीय अंतरिक्ष यात्री’.
मसाले भी साथ लाऊँगा...
विदेश में पढ़ाई करने का मौका मुझे रियलिटी शो के ज़रिए मिला है. वैसे भारत में रियलिटी शो को लेकर काफ़ी सवाल उठते रहे हैं- ख़ासकर ये आरोप कि इनमें प्रतियोगियों से बेतुके काम करवाए जाते हैं और ये नाटकीय होते हैं.
लेकिन मुझे नहीं लगता कि स्कॉलर हंट डेस्टिनेशन शो जैसे कार्यक्रम को उस क्रम में रखना चाहिए. इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी.
मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था विदेश में जाकर पढ़ाई कर पाऊँगा..भारी भरकम ख़र्च के चलते. लेकिन अब मैं ऐसा कर सकता हूँ.
मैं एक बार ब्रिटेन की वॉरिक यूनिवर्सिटी आ भी चुका हूँ-यूनिवर्सिटी वालों ने मुझे न्यौता दिया था.
अगर नेपाल को छोड़ दूँ, तो भारत से बाहर ये मेरी पहली विदेश यात्रा थी.
पहली बार वहाँ आकर अजीब सा लगा- बड़ी-बड़ी और खुली जगह लेकिन लोग मानो दिखते ही नहीं, बहुत कम.
और फिर ख़ाने में मसाले तो थे ही नहीं. ये कमी तो बेहद खली. इसलिए जब मैं सितंबर में पढ़ाई शुरू करने के लिए ब्रिटेन आऊँगा तो मैं भारत से ख़ूब सारे मसाले अपने साथ लेकर आऊँगा.
अब इंतज़ार है सितंबर में ब्रिटेन आने का.
(हाल ही में एक भारतीय टीवी चैनल ने रियलिटी शो करवाया था जिसके विजेता 18 वर्षीय अरविंद आराध्य को विशेष छात्रवृत्ति दी गई है. उसे ब्रिटेन के विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा. अरविंद बंगलौर के रहने वाले हैं.)
(बीबीसी संवाददाता वंदना से बातचीत पर आधारित)