रविवार, 26 अगस्त, 2007 को 17:46 GMT तक के समाचार
नेपाल की एक मंत्रिमंडलीय समिति ने सिफ़ारिश की है कि राजपरिवार के पाँच और महलों और राजा के आठ जंगलों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर देना चाहिए.
उल्लेखनी है कि पिछले हफ़्ते नेपाल की सरकार ने राजा ज्ञानेंद्र के सात महलों के राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा की थी.
इसमें काठमांडू में राजा का निवास नारायणहिति भी शामिल था.
हालांकि सरकार ने राजा और उनके परिवारजनों को इस साल के अंत में होने वाले जनमतसंग्रह तक वहाँ रहने की अनुमति दे दी थी लेकिन राजा ज्ञानेंद्र ने नारायणहिति को छोड़ भी दिया था.
राजा ज्ञानेंद्र राजधानी काठमांडू के एक और महल नागार्जुन में रहने चले गए हैं लेकिन अब यह महल भी राष्ट्रीयकरण की अगली सूची में शामिल है.
सिफ़ारिश
नेपाल के गृहमंत्री कृष्णप्रसाद सितौला के नेतृत्व वाली समिति ने राजा की कुछ और संपत्तियों के राष्ट्रीयकरण का फ़ैसला किया है.
नागार्जुन अलावा जिन महलों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की सिफ़ारिश की गई है उसमें राजधानी का एक और महल गोकर्णा, पोखरा में रत्ना महल, हेतौदा में कांति ईश्वरी महल शामिल हैं.
मंत्रिमंडलीय समिति ने राजा ज्ञानेंद्र के नाम दर्ज आठ जंगलों को भी राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की सिफ़ारिश की है.
ये जंगल कुल मिलाकर 35 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैले हुए हैं.
अधिकारविहीन राजा
अंतरिम सरकार ने अब तक लिए फ़ैसलों में राजा के लगभग सभी अधिकार छीन लिए हैं. इसके तहत उन्हें राज्याध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है और न अब वे सेना के प्रमुख हैं.
पिछले हफ़्ते सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि राजा ज्ञानेंद्र वह संपत्ति अपने पास रख सकते हैं जो उनके पास राजा बनने से पहले थी.
उल्लेखनीय है कि राजा ज्ञानेंद्र ने वर्ष 2001 में तत्कालीन राजा और उनके परिवार के अधिकाँश सदस्यों की हत्या के बाद राजकाज संभाला था.
कथित तौर पर राजकुमार ने ही अपने परिवार के लोगों को मार डाला था.
दो साल पहले राजा के ख़िलाफ़ नेपाल की जनता की नाराज़गी बढ़ गई थी.
बड़े जनाआंदोलन के बाद आख़िर उन्होंने संसद को बहाल करते हुए अंतरिम सरकार को सत्ता सौंप दी थी.