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रविवार, 26 अगस्त, 2007 को 02:29 GMT तक के समाचार

हैदराबाद धमाकों में 42 की मौत

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में शनिवार को हुए बम धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़ कर कर 42 हो गई है.

धमाकों के पीछे किसी चरमपंथी संगठन का हाथ बताया जा रहा है. शुरुआती जाँच के मुताबिक धमाकों में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक पदार्थ नागपुर से लाए गए थे.

धमाकों की चौतरफ़ा निंदा

केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के आज किसी समय हैदराबाद पहुँचने की संभावना है. एहतियाती तौर पर आंध्र प्रदेश और देश के अन्य संवेदनशील शहरों में चौकसी बढ़ा दी गई है.

बम धमाकों से ठीक पहले पुलिस ने चार लोगों के पास से दो करोड़ 36 लाख रूपए मूल्य के नकली नोट बरामद किए. इनमें से एक सऊदी अरब का रहने वाला है.

हैदराबाद स्थित बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ ने बताया है कि शनिवार रात तक 35 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी लेकिन यह संख्या बढ़ कर अब 42 हो गई है.

हैदराबाद धमाकों की तस्वीरें

हालाँकि ग़ैर सरकारी सूत्रों के मुताबिक 44 लोग मारे गए हैं. 60 से ज़्यादा लोग घायल हैं और इनमें से अधिकतर उस्मानिया अस्पातल में भर्ती हैं.

घायलों में कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है.

मरने वालों में से 26 शवों की पहचान हो चुकी है. कुछ शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है.

शक की सूई

हैदराबाद पुलिस ने बम धमाकों की जाँच शुरू कर दी है. बम धमाके भीड़-भाड़ वाली जगह लुम्बिनी पार्क और गोकुल चाट भंडार में हुए.

इन दो घटनाओं की जाँच चल ही रही थी कि दिलसुक नगर और मलकपेट के इलाक़ों में दो और जीवित बम मिले जिससे हड़कंप मच गया. ये बम रात लगभग साढ़े नौ बजे फटने वाले थे.

इन जगहों से जुटाए गए नमूनों के आधार पर पुलिस का कहना है कि विस्फोटक पदार्थ नागपुर से लाए गए थे और इन्हें टाइम बम की शक्ल में रखा गया था.

विस्फोटों के पीछे शक की सूई शाहिद उर्फ़ बिलाल के इर्द-गिर्द घूम रही है. तीन महीने पहले हैदराबाद के ही मक्का मस्जिद धमाके और अन्य चरमपंथी गतिविधियों में भी बिलाल का नाम आता रहा है.

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त बलविंदर सिंह ने धमाकों में किसी विदेशी चरमपंथी संगठन का हाथ होने की आशंका पर कोई टिप्पणी न करते हुए सिर्फ़ इतना कहा, "अभी तक जो जानकारी मिली है, उससे यह आतंकवादी घटना लगती है. पुख़्ता तौर पर हम अभी कुछ नहीं कह सकते कि किस संगठन का हाथ है."

सुरक्षा मामलों के जानकार प्रवीण स्वामी कहते हैं कि लश्करे तैयबा और हरक़तुल अल जेहादी अल इस्लामी (हूजी) की उपस्थिति इस इलाक़े में रही है.

चरमपंथियों का हाथ

मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने कहा, "आतंकवादी गतिविधियों ने निर्दोष लोगों की जानें ली हैं. मैं लोगों से अपील करता हूँ कि वे संयम बरते और उत्तेजित न हों. सरकार शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है."

राज्य के गृहमंत्री के जेना रेड्डी ने इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की आशंका जताई है.

हैदराबाद के ज़िलाधिकारी आरवी चंद्रवदन ने बीबीसी से हुई बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि आरंभिक जाँच से जो कुछ भी सबूत मिले हैं उसके चलते गृहमंत्री के ऐसा कहने के पीछे पुख्ता कारण नज़र आते हैं.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक मक्का मस्जिद में हुए हमले के बाद से ही ख़ुफ़िया विभाग इस तरह की चेतावनी दे रहा था कि शहर में और चरमपंथी हमले हो सकते हैं.

दिल दहलाने वाला मंज़र

विस्फोटों के बाद उस्मानिया अस्पताल में दिल दहला देने वाला मंज़र था. जो लोग मारे गए थे उनमें से किसी का सिर गायब था तो किसी के पाँव उड़े हुए थे.

लुम्बिनी पार्क राज्य सचिवालय के सामने पड़ता है. सप्ताहांत में इन दोनों इलाक़ों में ख़ासी भीड़ रहती है. लुम्बिनी पार्क के ऑडिटोरियम में उस समय धमाका हुआ जब वहाँ लेज़र शो चल रहा था. ऑडिटोरियम में तीन धमाके हुए.

माना जा रहा है कि उस समय वहाँ क़रीब 200 लोग मौजूद थे. दूसरा धमाका कोठी इलाक़े में स्थित मशहूर गोकुल चाट भंडार के सामने हुआ. यहाँ भी उस समय काफ़ी भीड़ थी.