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शुक्रवार, 24 अगस्त, 2007 को 10:48 GMT तक के समाचार

'मोनिका के नग्न फ़ोटो' नहीं दिखाएँ

हाल में फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामले में हैदराबाद की जेल से रिहा हुई फ़िल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी एक भारतीय टीवी चैनल पर अपनी नग्न तस्वीर दिखाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ले गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए भारत के केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में ज़रुरी कार्रवाई करे ताकि अन्य टीवी चैनल भी उनकी ये तस्वीर न दिखाएँ.

गुरुवार को एक भारतीय टीवी चैनल ने मोनिका बेदी से संबंधित एक ख़बर चलाई थी.

इसमें नग्न तस्वीर दिखाई गई और दावा किया गया कि ये मोनिका बेदी की उस समय की तस्वीर है जब वे भोपाल जेल में थीं.

मोनिका बेदी के वकील ने इस ख़बर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और फ़िलहाल केवल यही माँग की थी कि केंद्र सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने का आदेश दिया जाए.

याचिका की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने की.

निर्देश

पीठ ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय को आदेश दिया कि वह सभी न्यूज़ चैनलों को निर्देश जारी करे कि ये नग्न तस्वीर या उस समय खींची गई कोई अन्य ऐसी तस्वीर चैनलों पर न दिखाई जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने मोनिका बेदी को इजाज़त दी कि वे अन्य टीवी चैनलों को भी इस मामले में जोड़ना चाहें तो वे ऐसा कर सकती हैं.

इस मामले पर आगे सुनवाई अभी होना है.

मोनिका बेदी को कथित माफ़िया डॉन अबू सलेम के साथ सितंबर 2002 में पुर्तगाल में गिरफ़्तार किया गया था.

बाद में भारतीय सरकार के अनुरोध पर दोनों को भारत प्रत्यर्पित किया गया था.

अबू सलेम 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से संबंधित एक मामले में भी अभियुक्त हैं.