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गुरुवार, 23 अगस्त, 2007 को 13:21 GMT तक के समाचार

'नवाज़ शरीफ़ स्वदेश लौटने को आज़ाद'

निर्वासित जीवन जी रहे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ स्वदेश लौट सकते हैं. नवाज़ शरीफ़ की अपील पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा, "नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान लौट सकते हैं. उन्हें स्वदेश लौटने और एक नागरिक की तरह देश में रहने का अधिकार है."

अदालत ने अपने फ़ैसले में यह भी कहा है कि सरकार उनकी स्वदेश वापसी के रास्ते में किसी तरह का रोड़ा न अटकाए.

फ़ैसला आते ही अदालत के बाहर बड़ी संख्या में मौजूद नवाज़ शरीफ़ समर्थकों ने नारेबाज़ी शुरू की. लोगों ने नवाज़ शरीफ़ के पक्ष में और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए.

अक्तूबर 1999 में परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया था. उसके बाद नवाज़ शरीफ़ पर भ्रष्टाचार, कर चोरी, देशद्रोह, लोगों का जीवन ख़तरे में डालने और विमान अपहरण जैसे गंभीर आरोप लगे.

उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा भी सुनाई गई. लेकिन अगले साल यानी 2000 में नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ को देश से निर्वासित कर दिया गया.

पाकिस्तान सरकार ने भी अदालत में कुछ दस्तावेज़ पेश किए थे ताकि नवाज़ शरीफ़ की वतन वापसी को रोका जा सके.

पहली बार ऐसे दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए जिनके आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान सरकार के बीच किसी समझौते जैसी बात सामने आती है.

ग़ौरतलब है कि सात वर्ष पहले जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के हाथों में सत्ता आने के बाद से ही नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान से बाहर हैं और एक निर्वासित के रूप में सऊदी अरब और कुछ अन्य देशों में रह रहे हैं.

उनकी वतन वापसी को रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार ने अदालत में नवाज़ शरीफ़ के हस्ताक्षर वाला एक शपथपत्र पेश किया जिसके मुताबिक़ उन्होंने यह वादा किया है कि देश छोड़ने के 10 वर्ष बाद तक वो वतन वापसी नहीं करेंगे और देश की राजनीति या कारोबार में शामिल नहीं होंगे.

इनकार

नवाज़ शरीफ़ लगातार यह कहते रहे हैं कि निर्वासन को लेकर उन्होंने पाकिस्तान सरकार के साथ कोई समझौता नहीं किया था और न ही इस तरह का कोई वादा किया था.

अदालत में पेश किए गए इस दस्तावेज़ में नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार के तमाम सदस्यों के दस्तख़त हैं.

पिछले दिनों नवाज़ शरीफ़ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके कहा गया था कि उन्हं पाकिस्तान वापस आने दिया जाए.

उनकी इसी याचिका के ख़िलाफ़ पाकिस्तान सरकार की ओर से नवाज़ शरीफ़ के दस्तख़त वाला यह शपथपत्र अदालत में पेश किया गया था.

आसान नहीं है वापसी

पर वतन वापसी के साथ ही नवाज़ शरीफ़ की मुश्किलें बढ़ भी सकती हैं.

वजह यह है कि पाकिस्तान में उनपर अभी भी कई मामले लंबित हैं और पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर नवाज़ शरीफ़ की वतन वापसी होती है तो उनके ख़िलाफ़ बंद पड़े मामलों पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी.

पाकिस्तान में संसदीय कार्य मंत्री शेर अफ़ग़ान ने कहा है, "अगर अदालत नवाज़ शरीफ़ को वतन वापसी की इजाज़त देती है तो उन पर लगे आरोपों पर फिर से कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी."

जब उन्होंने पाकिस्तान छोड़ा था उस वक्त वो अपने ऊपर लगे दो आरोपों की सज़ा काट रहे थे.

एक आरोप हेलिकॉप्टर के दुरुपयोग का था और दूसरा मामला जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के विमान को उतरने की अनुमति न देने से संबंधित था.

इस सूरत में वो किसी चुनाव में भी सीधे तौर पर हिस्सा नहीं ले सकेंगे.