गुरुवार, 23 अगस्त, 2007 को 08:02 GMT तक के समाचार
ज्योत्सना सिंह
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली सरकार का कहना है कि दिल्ली के 'बार' में औरतों के शराब परोसने पर प्रतिबंध जारी रहना चाहिए क्योंकि उनके प्रति पुरुषों का व्यवहार ठीक नहीं होता.
पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय ने 92 साल पुराने एक क़ानून के कुछ हिस्सों को ख़त्म कर दिया था जिसमें औरतों को 'बार' और रेस्तराओं में शराब परोसने की मनाही थी.
अदालत के इस क़दम का बहुत सी शराब परोसने वाली लड़कियों और 'इंडियन होटल ऐसोसिएशन' ने स्वागत किया था.
लेकिन प्रतिबंध हटने से पहले ही मामला फिर से अदालत में पहुँच गया.
इस बार उच्चतम न्यायालय निर्देश जारी करने वाला है.
असुरक्षा
दिल्ली सरकार का कहना है कि शहर के पुरुष शराब पीकर अपने ऊपर काबू नहीं रख पाते इसलिए औरतों को 'बार' और रेस्तराओं में शराब परोसने की इजाज़त देना उनके लिए सुरक्षित नहीं होगा.
सरकार ने इस मामले में 1999 में हुए जेसिका लाल हत्याकांड के साथ-साथ कई अन्य उदाहरण भी दिए.
ऐसा माना जा रहा है कि शराब परोसने से मना करने पर जेसिका लाल की कुछ लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
लेकिन बहुत से लोग दिल्ली सरकार की इस दलील को सही नहीं मान रहे हैं.
सामाजिक विषयों की जानकार कामना प्रसाद का कहना है, "दुनिया के दूसरी जगहों की तरह इस शहर में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग हैं. दुनिया में हर जगह लड़कियाँ शराब परोसती हैं. इसलिए सरकार की यह दलील न्यायपूर्ण नहीं लगती."
सामाजिक मामलों पर नज़र रखने वाले सुहेल सेठ के विचार भी कुछ ऐसे ही हैं.
वो कहते हैं, "मेरे विचार से यह मूर्खतापूर्ण है. सरकार क़ानून और व्यवस्था ठीक करने की जगह लिंग भेद पैदा कर रही है. यह कहना तर्कहीन और मूर्खतापूर्ण है कि दिल्ली के पुरुष शराब पीकर अपने पर काबू नहीं रख पाते."
पिछले साल दिल्ली के पाँच लोगों की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में कहा गया था कि औरतों के शराब परोसने पर प्रतिबंध जारी रहना चाहिए.
दिल्ली सरकार सरकार इस जनहित याचिका का समर्थन कर रही है.