गुरुवार, 23 अगस्त, 2007 को 01:52 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारूक
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश में वामपंथी दलों ने भू-दख़ल आंदोलन का दूसरा चरण शुरू कर दिया है.
इस दौरान कई जगहों पर पुलिस के साथ आंदोलनकारियों की झड़पें हुई.
राज्य सरकार ने इस तरह की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है.
पिछले महीने राज्य के खम्मम ज़िले में भूमिहीनों को ज़मीन देने के लिए शुरू हुए आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था. पुलिस गोलीबारी में वामपंथी दलों के आठ कार्यकर्ता मारे गए थे और छह घायल हुए थे.
इसके बाद मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार राज्य के भूमिहीन ग़रीबों के बीच भू-आवंटन की प्रक्रिया तेज़ करेगी लेकिन वाम दल इससे खुश नहीं हैं.
इसी कड़ी में बुधवार को शुरू हुए आंदोलन में हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और कई अन्य जगहों पर हाथों में लाल झंडे लिए वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने खाली पड़े ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करना शुरू कर दिया.
ज़मीन पर कब्ज़ा
आंदोलनकारियों ने हैदराबाद के बेहद महँगे बंजारा हिल्स इलाक़े में भी खाली ज़मीन पर धावा बोल कर लाल झंडा गाड़ दिया जहाँ एक गज ज़मीन की क़ीमत लगभग डेढ़ लाख रूपए है.
प्रकाशम ज़िले में इस आंदोलन की अगुआई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता अतुल कुमार अंजान ने की.
उन्हें यहाँ पहुँचने से रोकने की पूरी कोशिश की गई लेकिन वो समुद्र के रास्ते आने में सफल हो गए.
इस बीच मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने कहा है कि उनकी सरकार अपने वायदों पर अमल करेगी लेकिन वाम दलों का इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है.
उनका कहना था, "हम भू-सुधार के लिए वचनबद्ध हैं और इस मामले में कांग्रेस को किसी अन्य पार्टी से पाठ सीखने की ज़रूरत नहीं है."
इस मुद्दे पर कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार और इसे समर्थन दे रहे वाम दलों के बीच कड़वाहट बढ़ गई है.