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बुधवार, 22 अगस्त, 2007 को 09:46 GMT तक के समाचार

शशिनाथ झा हत्याकांड में शिबू सोरेन बरी

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को शशिनाथ झा हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. उन्हें निचली अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

निचली अदालत के फ़ैसले के बाद शिबू सोरेन को मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और उन्हें झारखंड की दुमका जेल में रखा गया था.

सोरेन ने इसके ख़िलाफ अपील की थी जिस पर हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को पूरी तरह पलटते हुए शिबू सोरेन को बरी कर दिया है. शिबू सोरेन के अलावा इस मामले के पांच अन्य अभियुक्तो को भी बरी किए जाने की ख़बर है.

सोरेन को क़ानूनी कार्रवाई के बाद रिहा किया जाएगा. उधर शशिनाथ झा के परिवार वालों का कहना है कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.

शशिनाथ झा एक समय में शिबू सोरेन के निजी सचिव हुआ करते थे. 1994 में शशिना झा दिल्ली की धौला कुआं इलाक़े से गायब हुए थे.

इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई और इसके बाद रांची के नगड़ी में कुछ नरकंकाल मिले थे.

हालांकि इन नरकंकालों की डीएनए जांच से कभी ये नहीं पाया गया कि ये नरकंकाल शशिनाथ झा के हैं या नहीं.

इसके बावजूद सीबीआई की विशेष अदालत ने शिबू सोरेन को सज़ा सुनाई थी.

अब विश्लेषक सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं.

प्रतिक्रिया

शिबू सोरेन की रिहाई की ख़बर से पूरे झारखंड मे उत्साह है और सोरेन के पुत्र दुर्गा सोरेन ने इस पर खुशी जताई है.

झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि शिबू सोरेन को देर से ही सही न्याय मिला है.

उनका कहना था कि सोरेन की रिहाई से पूरे झारखंड की राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी.

उल्लेखनीय है कि सोरेन झारखंड के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं और राज्य की राजनीति पर उनकी ख़ासी पकड़ है.

शशिनाथ झा की मौत को नरसिम्हा राव सरकार के बहुमत साबित करने से जोड़ कर देखा जाता है.

कहा जाता है कि नरसिम्हा राव सरकार ने सांसदों को झामुमो के सांसदों को रिश्वत दी थी और इस संबंध में शशिनाथ झा को काफी जानकारी थी जो शायद उनकी मौत का कारण बनी