पाकिस्तान में सुरक्षा एजेंसियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए तीन ऐसे लोगों को रिहा कर दिया है जिन्हें अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा गया था.
पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी के मुखिया से सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर इन तीन लोगों में से एक को मंगलवार तक अदालत में पेश नहीं किया जाता है तो ख़ुद उन्हें ही जेल जाना पड़ सकता है.
वर्ष 2001 के बाद से पाकिस्तान में सैकड़ों लोग लापता हो गए हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उनमें से बहुत से लोगों को सुरक्षा एजेंसियों ने ही अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा है हालाँकि सुरक्षा एजेंसियाँ लापता लोगों के पते-ठिकाने के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार करती रही हैं.
मंगलवार को जिन तीन लोगों को रिहा किया गया उनमें एक अब्दुल बासित, जर्मन नागरिक अलीम नासिर और पाकिस्तानी-मलेशियाई नागरिक इमरान मुनीर हैं. ये लोग रिहा होने के बाद अपने परिवारों से मिले.
पाकिस्तान में लापता लोगों के मामले ने तब ज़ोर पकड़ा था जब 2006 में मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने ऐसे मामलों की नियमित सुनवाई शुरू की और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को आदेश दिया कि जिन लोगों को अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा गया है उन्हें न्यायालय में पेश किया जाए.
ग़ौरतलब है कि ख़ुद मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को मार्च 2007 को परवेज़ मुशर्रफ़ सरकार ने बर्ख़ास्त कर दिया था. चौधरी पर सत्ता का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए थे.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फ़ैसला दिया कि इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी की बर्ख़ास्तगी ग़ैरक़ानूनी थी और जुलाई में चौधरी को मुख्य न्यायाधीश पद पर बहाल कर दिया गया था.
उसके बाद से चौधरी ने न्यायिक सक्रियता का अपना अभियान फिर शुरू कर दिया है जिसके तहत अनेक राजनीतिक मामलों में सरकार विरोधी फ़ैसले भी सुनाए गए हैं.