बुधवार, 22 अगस्त, 2007 को 08:35 GMT तक के समाचार
विमान दुर्घटना में मौत के 40 साल बाद हिमालय की पहाड़ियों में भारतीय सैनिक का पार्थिव शरीर सुरक्षित अवस्था में मिला और अब पूरे सैनिक सम्मान के साथ असम के पैतृक गाँव में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
40 साल पहले 100 सैनिकों को लेकर जा रहा सेना का विमान पहाड़ियों के ऊपर 20 हज़ार फीट की ऊंचाई पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उसमें 22 साल के महेंद्र नाथ फूकन भी थे.
दुर्घटना के बाद लाख कोशिशों के बावजूद फूकन और दो अन्य के पार्थिव शरीर नहीं खोजे जा सके थे.
इस महीने के शुरू में सेना की एक टीम को हिमाचल प्रदेश में पहाड़ियों में क़रीब 6, 264 मीटर की ऊंचाई पर फूकन का पार्थिव शरीर सुरक्षित अवस्था में मिला.
महेंद्र नाथ फूकन के छोटे भाई दुर्गानाथ फूकन ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया, '' भगवान चाहते थे कि हम उनके शरीर के दर्शन करें, इसलिए इतने दिनों तक उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखा.''
फूकन के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर दिल्ली से सोमवार को असम के डिब्रूगढ़ लाया गया.
परिवार के लोगों ने बताया कि इसके बाद इसे गाँव लाया गया, जहाँ सैकड़ों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
पुलिस अधीक्षक श्यामल सैकिया ने बताया,'' सेना ने पूरे सैनिक सम्मान और बंदूकों की सलामी के साथ उनका अंतिम संस्कार किया.''
उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह पर फूकन का अंतिम संस्कार हुआ है वहाँ सेना एक स्मारक बनाने की योजना भी बना रही है.