सरकारी मीडिया के मुताबिक़ बर्मा के सैनिक शासन ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी के विरोध में तीन दिन पहले रंगून में प्रदर्शन करने वाले कम से कम 13 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है.
मंगलवार रात जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें से कम से कम सात लोकतंत्र समर्थक छात्रों के समूह के शीर्ष नेताओं में से हैं.
यह ग्रुप वर्ष 1988 में लोकतंत्र बहाली के लिए हुए आंदोलन का अगुआ था.
इन लोगों ने तीन दिन पहले रंगून में विरोध का नेतृत्व किया था और ऐसी रिपोर्ट थी कि वे और प्रदर्शन कर सकते हैं.
सरकारी मीडिया का कहना है कि इन कार्यकर्ताओं को देश की स्थिरता और सुरक्षा को नुक़सान पहुँचाने के कारण गिरफ़्तार किया गया है.
गिरफ़्तार प्रदर्शनकारियों में बर्मा के सबसे प्रमुख विद्रोही मिन को नैंग भी हैं.
मानवाधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए नैंग को अमरीकी और यूरोपीय पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है.
इसके अलावा विश्वविद्यालय के पाँच छात्रों और दूसरे गुट के तीन छात्रों को गिरफ़्तार किया गया है. बाक़ी गिरफ़्तार लोगों के बारे सरकारी मीडिया ने कुछ भी नहीं बताया है.
पिछले सप्ताह बर्मा में बिना घोषणा के ही पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगभग दोगुने हो गए थे. इसके बाद ज़्यादातर बसें और टैक्सी सड़कों पर नहीं चलीं.
बैंकॉक में बीबीसी के संवाददाता जोनाथन हेड का कहना है कि सरकार को डर है कि तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का विरोध बढ़ सकता है और प्रदर्शनकारियों की गिरफ़्तारी इसे दबाने के लिए की गई है.