मंगलवार, 21 अगस्त, 2007 को 07:16 GMT तक के समाचार
अमरीका में भारत के राजदूत रोनेन सेन ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर दिए गए कथित बयान के लिए माफ़ी माँगी है.
संसद में भारी हंगामे के बीच विदेश मंत्री ने इसकी सूचना दी, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि रोनेन सेन के अनौपचारिक बयान को ग़लत तरीक़े से प्रकाशित कर दिया गया था.
सेन ने रिडीफ़ डॉट कॉम को दिए गए एक इंटरव्यू में कथित तौर पर कहा था कि '' इसे (परमाणु समझौता) यहाँ राष्ट्रपति और वहाँ कैबिनेट ने पारित किया, तो फिर सिरकटे मुर्गे (हेडलेस चिकन) की तरह क्या फड़फड़ाना.''
विदेश मंत्री ने राजदूत का बचाव करते हुए कहा कि "उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है लेकिन उन्होंने अपने बयान के लिए माफ़ी माँग ली है."
रोनेन सेन का बयान विदेश मंत्री ने संसद में पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने कहा, "मैंने अनौपचारिक बातचीत में अपने विचार प्रकट किए थे और मेरे विचार किसी व्यक्ति या संस्था के बारे में नहीं बल्कि मीडिया के अपने कुछ दोस्तों के बारे थे, फिर भी अगर किसी की भावना को चोट पहुँची है तो मैं माफ़ी माँगता हूँ."
हंगामा
जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, एनडीए और वामपंथी सदस्यों ने अख़बारों की प्रति लहराते हुए इस मामले को उठाया.
राज्यसभा में सभापति हामिद अंसारी ने संसदीय कार्यमंत्री सुरेश पचौरी से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा.
सुरेश पचौरी कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी.
इस दौरान भाजपा सदस्य सभापति के आसन के नजदीक आ गए जिस पर सभापति ने दोपहर तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.
लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने विपक्षी दलों की राजदूत को वापस बुलाने की माँग पर कहा कि सिर्फ़ अख़बार की ख़बर के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती.
बाद में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा की संसदीय प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने कहा कि रोनेन सेन को तत्काल वापस बुलाया जाए और संसद के समक्ष पेश कर प्रताड़ित किया जाए.