सोमवार, 20 अगस्त, 2007 को 21:20 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष इसी तरह से जारी रहेगा तो और ज़्यादा नागरिकों को घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा.
संयुक्त राष्ट्र की ओर से नागरिकों की स्थिति पर यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान ज़ोरों पर है.
संयुक्त राष्ट्र ने पिछले दिनों इन तमाम स्थितियों का अध्ययन करने के लिए एक विशेष राजदूत को अफ़ग़ानिस्तान भेजा था.
राजदूत केलिन ने अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब एक हफ़्ते का वक्त बिताने के बाद अपनी रिपोर्ट में यह चिंता व्यक्त की है.
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा है कि युद्ध में शामिल सभी पक्षों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस संघर्ष के कारण नागरिकों को क्षति न पहुँचे.
हालांकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मुख्य रूप से तालेबान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि तालेबान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों की अनदेखी की जा रही है.
विस्थापन को मजबूर
ग़ौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में ही कई हज़ार लोगों को संघर्ष के चलते अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले कुछ बरसों के दौरान जारी संघर्ष को लेकर कई मानवाधिकार संगठन चिंता जताते रहे हैं.
तालेबान चरमपंथियों को खत्म करने के लिए नैटो गठबंधन सेना के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान भी वहाँ चलाया जा रहा है.
चिंता की बात यह है कि संघर्ष के कारण दोनों ही पक्षों की गोलीबारी और हमलों का शिकार समय-समय पर आम लोग भी होते रहे हैं.
इसका परिणाम यह हुआ है कि आम नागरिकों को शारीरिक-मानसिक-आर्थिक रूप से नुकसान तो उठाना ही पड़ा है साथ ही उन्हें अपनी रहने की जगहों से विस्थापित भी होना पड़ रहा है.