सोमवार, 20 अगस्त, 2007 को 05:04 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में संजय दत्त और पाँच अन्य लोगों को अंतरिम ज़मानत दे दी है.
उनकी यह ज़मानत टाडा अदालत के फ़ैसले की प्रति मिलने तक प्रभावी रहेगी.
ग़ौरतलब है कि मुंबई बम धमाके के फ़ैसले की प्रति न तो अभियुक्तों को मिली है और न ही सीबीआई को मिल पाई है.
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत देते हुए इन लोगों के लिए कई शर्तें भी निर्धारित की हैं.
अदालत ने कहा है कि जिस दिन फ़ैसले की प्रति मिलेगी, उस दिन संजय दत्त सहित इन सभी लोगों को आत्मसमर्पण करना होगा.
इन लोगों को सप्ताह में एक दिन मुंबई में सीबीआई के समक्ष पेश होना होगा.
मुख्य न्यायधीश केजी बालाकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि फ़ैसले की प्रति मिलने के बाद ये सभी लोग ज़मानत के लिए अपील कर सकते हैं जिस पर योग्यता के आधार पर फ़ैसला किया जाएगा.
संजय दत्त के अलावा जिन पाँच अन्य लोगो को अंतरिम ज़मानत दी गई है, उनमें समीर हिंगोरा, अज़ीज़ अहमद, जेबुन्निसा, इब्राहिम मूसा और यूसुफ़ नलवाला शामिल हैं.
ऐसे ही एक मामले में 1983 में सुप्रीम कोर्ट ने अकाली नेता जगदेव सिंह तलवंडी को ज़मानत दे दी थी.
कठोर सज़ा
ग़ौरतलब है कि अवैध हथियार रखने के जुर्म में टाडा अदालत ने संजय दत्त को 6 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी.
संजय दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में सज़ा के ख़िलाफ़ अपील दायर की थी, साथ ही ज़मानत देने का भी अनुरोध किया था.
दस अगस्त को मुख्य न्यायधीश केजी बालाकृष्णन और जस्टिस आरवी रवींद्रन की खंडपीठ ने संजय दत्त की ओर से दलीलें सुनने के बाद ज़मानत अर्जी पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था.
सीबीआई का कहना था कि फ़ैसले की प्रति न मिल पाने के कारण वह जवाब दाखिल नहीं कर पा रही है.
मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 'आर्म्स एक्ट' के तहत फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त को छह साल की सज़ा सुनाई थी.
संजय दत्त पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था.
जज पीडी कोडे ने संजय दत्त की ज़मानत अर्जी भी नामंजूर कर दी थी.
इसके बाद संजय दत्त को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें ऑर्थर रोड जेल भेज दिया गया था. बाद में उन्हें पुणे की यरवदा जेल भेज दिया गया.