सोमवार, 20 अगस्त, 2007 को 06:58 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि तेल आयात पर लगातार बढ़ता ख़र्च भारतीय अर्थव्यवस्था पर असहनीय बोझ डाल रहा है और देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा अहम भूमिका निभाएगी.
राजधानी में सोमवार को तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम यानी ओएनजीसी के नए भवन की आधारशिला रखने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा, “ फिलहाल भारतीय कंपनियां कुल घरेलू खपत का एक तिहाई तेल का ही उत्पादन करती हैं. बाकी ज़रूरत आयातित तेल से पूरी करनी होती है."
साथ ही उन्होंने कहा, " हम इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि भारत में तेल एवं गैस के भंडार सीमित हैं.”
उन्होंने कहा, “तेल के आयात पर ख़र्च का बोझ भारतीय अर्थव्यवस्था के पर असहनीय बोझ डालेगा.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि यही वजह रही कि उनकी सरकार ऊर्जा की इस बढ़ती ज़रूरत को पूरा करने के लिए नई रणनीति बनाने पर मज़बूर हुई.
परमाणु और सौर ऊर्जा स्रोतों को ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अहम बताते हुए उन्होंने कहा, “परमाणु और सौर ऊर्जा स्रोत ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.”
प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, “ हमारी सरकार परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए संकल्पबद्ध है.”
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान ऐसे समय आया है जब अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौते को लेकर सरकार पर संकट के बादल छाए हुए हैं.
उधर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के मुख्य घटक दल भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि भारत-अमरीका परमाणु समझौता देशहित से जुड़ा मुद्दा है और लेफ्ट और यूपीए का घरेलू मामला नहीं है.
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने यहाँ संवाददाताओं से बातचीत में कहा, " इस मसले पर विचार के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जाना चाहिए और जब तक समिति की रिपोर्ट न आ जाए तब तक इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया जाना चाहिए."