रविवार, 19 अगस्त, 2007 को 16:34 GMT तक के समाचार
पीएम तिवारी
कोलकाता से
पहले हैदराबाद में हमला, फिर हत्या का फ़तवा और उसके बाद पश्चिम बंगाल में उठी राज्य से बाहर निकालने की माँग.
तस्लीमा नसरीन के लिए पिछला एक पखवाड़ा काफ़ी परेशान करने वाला रहा है लेकिन वे कहती हैं कि वे इस तरह के शत्रुतापूर्ण रवैए से विचलित नहीं हैं.
पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी है और तस्लीमा का कहना है कि वे किसी भी हालत में अपने 'दूसरे घर' यानी कोलकाता को छोड़ना नहीं चाहतीं.
उन्होंने भारत की नागरिकता या स्थायी आवासीय परिमट के लिए केंद्र सरकार को अर्जी दे रखी है. केंद्र ने शनिवार को उनके वीजा की मियाद और छह महीने के लिए बढ़ा दी है.
इस कोलाहल के बीच कोलकाता में वे अपने विवादास्पद उपन्यास ‘लज्जा’ की अगली कड़ी के तौर पर ‘शर्म’ लिखने में जुटी हैं.
इसमें तमाम प्रमुख पात्र ‘लज्जा’ वाले ही हैं, लेकिन इसे भारत की पृष्ठभूमि में लिखा जा रहा है. हैदराबाद की घटना का जिक्र करते हुए वे कहती हैं कि "मैंने अपने खिलाफ प्रदर्शन और फतवा तो देखा-सुना था. लेकिन वहाँ पहली बार लोगों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने पर आमादा देखा. उनका जुनून देख कर मेरे जहन में लज्जा के बाद बांग्लादेश में पैदा हालात की यादें ताजा हो गईं."
वे कहती हैं कि "ऐसी घटनाएं मुझे लिखने-बोलने से नहीं डिगा सकतीं. मैं महिलाओं के हक में आवाज उठाती रहूंगी."
अपना वीजा बढ़ाए जाने से खुश तस्लीमा को उम्मीद है कि सरकार नागरिकता या स्थाई आवासीय प्रमाणपत्र देने का उनका अनुरोध भी स्वीकार कर लेगी. वे सवाल करती हैं कि "आखिर सरकार कब तक मेरी रक्षा करती रहेगी? जीवन पर खतरा तो है ही. लेकिन मैंने कभी हारना नहीं सीखा है. और फिर अपना यह दूसरा घर छोड़ कर मैं कहां जाऊं?"
धमकियाँ
पिछले शुक्रवार को कोलकाता की टीपू मस्जिद के शाही इमाम और मजलिस-ए-शूरा नाम के इस्लामी संगठन ने तस्लीमा की जान लेने वाले को अथाह धन देने का ऐलान किया था.
यही नहीं, इमाम ने मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को एक पत्र भेजकर कहा कि "इस्लाम का अपमान करने वाली तस्लीमा" का वीजा रद्द कर उसे जितनी जल्दी हो सके, देश से निकाल दिया जाए."
इमाम सैयद मोहम्मद नूरुल रहमान बरक़ती कहते हैं कि "यह फतवा नहीं है. लेकिन तस्लीमा जिस तरह लगातार इस्लाम का अपमान कर रही हैं, उससे लोगों में भारी नाराज़गी है. ऐसे में अगर उनको कुछ हो गया तो संगठन को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता."
निंदा
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु समेत तमाम लोगों ने तस्लीमा के खिलाफ जारी फतवे की निंदा की है. बसु कहते हैं कि "सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में ऐसा नहीं होना चाहिए. वे कहते हैं कि अब तस्लीमा को और सतर्क रहना होगा. साथ ही सरकार को भी इस मामले को महत्व देना चाहिए. लोकतंत्र में सबको अभिव्यक्ति का अधिकार है."
मगर राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री अब्दुस सत्तार का सुर ज़रा अलग है, "अतिथियों का राज्य में स्वागत है लेकिन अतिथि को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि उसके किसी काम से स्थानीय लोगों की भावनाओं को कोई ठेस नहीं पहुँचे."
नई धमकियों के बाद तस्लीमा की सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई है. पहले उनके आवास पर सिर्फ तीन पुलिस वाले तैनात थे. अब शनिवार से उनकी तादाद बढ़ाकर 22 कर दी गई है.
उनकी गतिविधियों और कार्यक्रमों पर भी नज़र रखी जा रही है. उनसे मिलने-जुलने वालों पर अंकुश लगा दिया गया है. राज्य के मुख्य सचिव अमित किरण देव कहते हैं कि "तस्लीमा को पहले भी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी और आगे भी यह जारी रहेगी."