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शुक्रवार, 17 अगस्त, 2007 को 20:37 GMT तक के समाचार

यूपीए-वाम रिश्तों में 'नरमी' के संकेत

अमरीका के साथ परमाणु समझौते पर चर्चा के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो की बैठक के पहले दिन कोई नतीज़ा नहीं निकला.

हालाँकि सरकार के साथ तनाव में नरमी आने के संकेत हैं.

इस बीच माकपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने शुक्रवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की.

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंध (यूपीए) सरकार को बाहर से समर्थन दे रहो वाम दलों ने परमाणु समझौते के ख़िलाफ़ जिस तरह से अड़ियल रवैया अपनाया और फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें समर्थन वापस ले लेने की 'धमकी' दी उससे उपजे तनाव में शुक्रवार को नरमी के संकेत मिले.

माकपा महासचिव प्रकाश कारत ने पोलित ब्यूरो की बैठक शुरू होने से कुछ देर पहले यूपीए सरकार के साथ रिश्तों के बारे में कुछ यूँ टिप्पणी की, "हनीमून ख़त्म हुआ माना जा सकता है लेकिन शादी जारी रह सकती है."

पोलित ब्यूरो की बैठक के पहले दिन चर्चा में क्या तस्वीर सामने आई, इस बारे में माकपा नेताओं ने कुछ भी नहीं कहा. संभावना है कि शनिवार को बैठक के अंतिम दिन ही इस पर कोई औपचारिक घोषणा होगी.

भाकपा भी नरम

माकपा की राय के विपरीत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने सरकार की आलोचना जारी तो रखी लेकिन समर्थन वापसी पर उनके तेवर में भी नरमी दिखाई दी.

भाकपा महासचिव एबी बर्धन ने यूपीए के साथ रिश्तों के लिए एक बार फिर 'हनीमून' शब्द का इस्तेमाल किया.

उनका कहना था, "हनीमून ख़त्म हो गया है. शादी जारी रह सकती है लेकिन बिना प्यार के."

भाकपा ने इस मौके का इस्तेमाल करते हुए न केवल परमाणु समझौता बल्कि अमरीका के साथ साझा सैनिक अभ्यास जैसे मुद्दों पर भी आपत्ति जताई.

संसद में हंगामा

अमरीका के साथ परमाणु समझौते का मामल एक बार फिर लोकसभा में उठा लेकिन सरकार को उस समय राहत मिली जब अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी इस पर चर्चा के लिए विपक्ष के निंदा प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि किसी अन्य देश के साथ हुए समझौते पर सरकार को निर्देश देने का अधिकार संसद के पास नहीं है.

विपक्ष की मांग है कि सरकार 123 परमाणु समझौते में संशोधन के लिए फिर से विचार करे और इस पर संसद मे नियम 184 के तहत चर्चा कराई जाए.

नियम 184 के तहत सदन में चर्चा के साथ मतदान का भी प्रावधान है.

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे किसी समझौते पर नियम 184 के तहत सदन में कभी चर्चा नहीं हुई. उन्होंने इसे सरकार का विशेषाधिकार बताते हुए संसद के अधिकारक्षेत्र से बाहर बताया.