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शुक्रवार, 17 अगस्त, 2007 को 18:22 GMT तक के समाचार

अविनाश दत्त
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव हो'

भारतीय संसद की एक समिति ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और उनके ख़िलाफ़ शिकायतों की जाँच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की सिफ़ारिश की है.

इस रिपोर्ट के सामने आने से न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव बढ़ सकता है.

समिति ने न्यायिक जाँच विधेयक (2006) में आमूल चूल परिवर्तन करने की सिफ़ारिश की है.

26 सदस्यीय संसदीय समिति का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और उनके ख़िलाफ़ शिकायतों की जाँच के लिए राष्ट्रीय न्यायिक परिषद( एनएससी) का गठन किया जाना चाहिए जिसके सदस्य सिर्फ़ जज न हो कर बाहर से भी हों.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद तारिक़ अनवर भी इससे सहमत हैं. वो कहते हैं, "अगर प्रधानमंत्री पर भी किसी तरह का आरोप लगता है तो उनके ख़िलाफ़ जाँच होती है तो फिर न्यायपालिका भी समाज का हिस्सा है."

मौजूदा नियम

वर्तमान में केवल सांसद ही जजों के ख़िलाफ़ शिकायत कर सकते हैं और वह भी तब जब उन्हें 100 लोकसभा या 50 राज्यसभा सदस्यों का समर्थन हासिल हो.

इसी तरह सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जजों के ख़िलाफ़ शिकायत केवल लोकसभा और राज्यसभा अध्यक्ष ही स्वीकार कर सकते हैं. आम आदमी किसी तरह की आधिकारिक शिकायत नहीं कर सकता.

न्यायिक जाँच विधेयक को लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यही था कि इन शिकायतों की जाँच हो सके. इसमें एक ऐसी राष्ट्रीय न्यायिक परिषद प्रस्तावित थी जिसमें केवल जज ही हों.

इसमें कहा गया था कि कोई भी आम आदमी इस परिषद में शिकायत दर्ज करा सकता है लेकिन संसद में तभी बहस हो सकती है जब जजों वाली एनएससी शिकायत पर आपना फ़ैसला दे दे.

लेकिन संसदीय समिति के सांसदों ने इस प्रावधान का विरोध किया. समिति के एक सदस्य ने टिप्पणी की है कि जजों की नियुक्ति जज करें यह पहले ही गड़बड़ था और किसी जज पर लगे शिकायतों की जाँच भी जज ही करें, यह तो और भी ग़लत है.

सुप्रीम कोर्ट के वक़ील प्रशांत भूषण का कहना है कि यह रिपोर्ट अभी भी कमज़ोर है पर स्वागतयोग्य है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पीबी सामंत भी संसदीय समिति की सिफ़ारिशों को सही ठहराते हैं. वो कहते हैं, "एनएससी में बाहरी सदस्य हों तो कोई दिक्क़त नहीं होनी चाहिए. आम लोगों में भी इस तरह भावना रही है कि जज ही अपने अन्य सहयोगियों की जाँच करें, यह ठीक नहीं होगा. कोई निष्पक्ष मशीनरी होनी चाहिए और यह तभी संभव है जब बाहर के लोगों को भी इसमें शामिल किया जाए."