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सोमवार, 13 अगस्त, 2007 को 12:36 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

हथियार डिपो से 15 लाशें निकलीं

भारत प्रशासित कश्मीर में अनंतनाग में सैनिक हथियार डिपो में लगी आग में झुलस कर मरने वालों की कुल संख्या 20 हो गई है.

भारतीय सैनिकों ने आग बुझाए जाने के बाद डिपो से पंद्रह लाशें निकाली हैं, इससे पहले सेना ने पाँच लोगों के मरने की पुष्टि की थी.

शनिवार की सुबह खुंदरू में लगी इस भीषण आग को काफ़ी मुश्किल से बुझाया जा सका है.

जो पंद्रह लाशें निकाली गई हैं उनकी शिनाख्त मेजर अतुल कुमार और सैन्य अग्निशामक बल के 13 कर्मचारियों के रूप में की गई है.

अभी एक लाश की शिनाख़्त नहीं हो पाई है जबकि 10 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.

आसपास के लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लगभग 12 हज़ार लोगों को सरकारी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है.

भारतीय सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग का कहना है कि इस आग से बहुत नुक़सान हुआ है, पंद्रहवी कोर का काफ़ी गोला-बारूद बर्बाद हो गया है.

आग तो बुझा दी गई है लेकिन बीच-बीच में धमाके हो रहे हैं. लेफ़्टिनेंट जनरल पनाग ने बताया कि "हम 48 घंटे तक इंतज़ार करेंगे, उसके बाद सेना अंदर जाएगी."

हथियार

लेफ़्टिनेंट जनरल पनाग ने बताया कि यह हथियार डिपो आतंरिक सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि सेना की बाह्य सुरक्षा की ज़रूरतों के लिए था. उनका कहना है कि इस डिपो में हर वो हथियार था जिसका इस्तेमाल परंपरागत युद्धों में होता है.

इलाक़े की सफ़ाई का काम शुरू हो चुका है क्योंकि कई स्थानों पर मलबा और उड़कर आए विस्फोटकों को साफ़ किया जा रहा है.

उन्होंने बताया, "225 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े को साफ़ करना है, जिसमें एक सप्ताह का समय लग सकता है."

लेफ़्टिनेंट जनरल पनाग ने कहा, "इस डिपो में सैकड़ों लोग काम करते थे, ये चमत्कार है, ख़ुदा की मेहरबानी है कि इतना कम जानी नुक़सान हुआ है."

उत्तरी कमान के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस घटना से सेना की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि यह बहुत ही सुरक्षित डिपो था और इसकी सुरक्षा बहुत चुस्त थी, ऐसी कोई संभावना नहीं है कि यह चरमपंथियों की साज़िश का परिणाम हो.