रविवार, 12 अगस्त, 2007 को 09:30 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए शांति जिरगा में आए प्रतिनिधियों ने छह सूत्रीय बयान में कहा है कि ये ज़रूरी है कि अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान दोनों चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ें.
साथ ही मादक पदार्थों के अवैध व्यापार और सीमा के पास आर्थिक योजनाओं को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है.
बयान में एक संयुक्त परिषद बनाने का मुद्दा भी उठाया गया है जो अफ़गान सरकार के विरोधियों के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश करेगा.
इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने शांति जिरगा में कहा था कि चरमपंथियों को हाशिए पर करने के लिए दोनों देशों को और काम करना होगा.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को तालेबान चरमपंथियों को इस बात के लिए राज़ी करना होगा कि वे शांति की ओर लौटे.
हालांकि उन्होंने ये भी माना कि पाकिस्तान के कबायली इलाक़ों में चरमपंथियों को समर्थन हासिल है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार क़दम उठा रही है कि इस समर्थन के चलते समस्याएँ खड़ी न हों.
मुशर्रफ़ गुरुवार को शांति जिरगा के उदघाटन सत्र में शामिल होने वाले थे लेकिन पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया था.
शांति जिरगा
चरमपंथ के मुद्दे पर बात करने के लिए काबुल में हुए जिरगा में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के करीब 700 क़बायली नेताओं, मौलवियों और नेताओं को आमंत्रित किया गया था
लेकिन तालेबान और वज़ीरिस्तान के नेता इसमें हिस्सा नहीं लिया.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी जिरगा को संबोधित किया है.
दोनों देशों के बीच तालेबान के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है. दोनों देश ‘आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध’ में अमरीका के साथ हैं लेकिन कई अफ़गान अधिकारियों ने पाकिस्तान पर तालेबान को समर्थन देने का आरोप लगाया है.
पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.
पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान की सीमा पर पिछले कुछ महीनों से हिंसक गतिविधियों मे लगातार बढ़ोतरी हुई है.
कहा जाता है कि इन इलाक़ों में तालेबान, अल क़ायदा और स्थानीय कबायली चरमपंथी गुटों का दबदबा बढ़ता जा रहा है जो हिंसा का कारण है.