रविवार, 12 अगस्त, 2007 को 07:18 GMT तक के समाचार
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में शनिवार की रात एक बार फिर संदिग्ध चरमपंथियों ने हिंदीभाषियों को निशाना बनाया और चार लोगों की हत्या कर दी है.
पुलिस का कहना है कि ताज़ा घटना के पीछे भी उल्फा और एक अन्य चरमपंथी संगठन का हाथ हो सकता है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार चरमपंथियों ने कारबी आंगलांग ज़िले में रंगमहल घाट गांव पर हमला किया और एक महिला और एक छोटे बच्चे समेत चार लोगों की हत्या कर दी.
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले यानी शुक्रवार की रात भी चरमपंथियों ने 12 हिंदीभाषी लोगों की हत्या कर दी थी.
इसके साथ ही पिछले सात दिनों में असम में चरमपंथी हमलों में मारे गए लोगों की संख्या 30 पहुंच गई है.
इनमें से 26 लोग हिंदीभाषी हैं. बुधवार से लेकर अभी तक कारबी आंगलांग ज़िले में हिंदीभाषियों पर तीन हमले हो चुके हैं.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एस के गोगोई के अनुसार चरमपंथी इस इलाक़े को चुनते हैं क्योंकि इन इलाक़ों में सुरक्षा बलों की संख्या कम है.
कारबी आंगलांग के उपायुक्त एम अंगामुत्तु का कहना है कि ज़िले से हिंदीभाषी लोगों को हटा कर अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है क्योंकि सभी लोगों को हमेशा सुरक्षा दे पाना संभव नही है.
उल्लेखनीय है कि शनिवार को मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने हिंदीभाषी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की घोषणा की थी.
शनिवार को बीबीसी से एक बातचीत में तरुण गोगोई ने कहा कि इन घटनाओं के पीछे विदेशी शक्तियों का भी हाथ है.
यह पूछे जाने पर कि विदेशी हाथ से उनका इशारा किस ओर है तो उन्होंने कहा ' मैं तो नाम नहीं लूंगा लेकिन सब जानते हैं कि चरमपंथी भाग कर बांग्लादेश चले जाते हैं. कारबी आंगलांग नगालैंड से सटा हुआ है. एनएससीएन है. खापलांग है. कई लोग जुड़े हैं हिंसा फैलाने में. '
स्वतंत्रता दिवस से पहले असम में हिंदीभाषियों पर हमले बढ़ गए हैं और जानकारों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में और हमले भी हो सकते हैं.
पिछले साल सितंबर में अल्फ़ा और सरकार के बीच बातचीत टूट जाने के बाद चरमपंथी हमले तेज़ हुए हैं. उसके बाद से लेकर अब तक लगभग 150 हिंदीभाषी मारे गए हैं.