रविवार, 12 अगस्त, 2007 को 05:20 GMT तक के समाचार
काबुल में शांति और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के प्रयासों के तहत चल रहे सम्मेलन या जिरगा का आज आखिरी सत्र है जिसमें हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ काबुल पहुंच गए हैं.
अधिकारियों का कहना है कि मुशर्रफ़ की मुलाक़ात अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से होगी.
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि मुशर्रफ़ इस जिरगा में शिरकत कर रहे पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के सात सौ से अधिक प्रतिनिधियों को भी संबोधित करेंगे.
दोनों देशों के बीच तालिबान के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है. दोनों देश आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में अमरीका के साथ हैं लेकिन कई अफ़गान अधिकारियों ने पाकिस्तान पर तालिबान को समर्थन देने का आरोप लगाया है.
पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.
उल्लेखनीय है कि मुशर्रफ़ इस जिरगा के उदघाटन सत्र में शामिल होने वाले थे लेकिन पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया था.
काबुल में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहन है कि जिरगा में आतंकवाद के खात्मे से जुड़ा बयान जारी किया जा सकता है.
कहा जा रहा है कि जिरगा को संबोधित करने से पहले मुशर्रफ़ अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से बातचीत करेंगे.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्त तसनीम असलम ने एएफपी से कहा ' हमें उम्मीद है कि जिरगा इन इलाक़ों में शांति स्थापित करने में मदद करेगा.हमारा मानना है कि अफ़गानिस्तान में शांति हमारे लिए महत्वपूर्ण है. '
जिरगा में इसी मुद्दे पर दोनों ही देशों के सैकड़ों प्रतिनिधि चर्चा कर रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में अफ़गानिस्तान के कई इलाक़ों में तालिबान और अल क़ायदा का प्रभुत्व बढ़ा है.
पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान की सीमा पर पिछले कुछ महीनों से हिंसक गतिविधियों मे लगातार बढ़ोतरी हुई है. कहा जाता है कि इन इलाक़ों में तालिबान, अल क़ायदा और स्थानीय कबायली चरमपंथी गुटों का दबदबा बढ़ता जा रहा है जो हिंसा का कारण है.
उधर कई पाकिस्तानी कबायली नेता भी इसमें शामिल नहीं हुए हैं. उनका कहना है कि जिरगा में समस्या के सभी पक्ष मसलन तालिबान के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए हैं, इसलिए उनके शामिल होने का कोई तुक नहीं है.