शुक्रवार, 10 अगस्त, 2007 को 16:48 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश के चुनाव आयोग को हुक्म दिया है कि वो एक महीने के भीतर संशोधित मतदाता सूची तैयार करे.
चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों के पास कंप्यूटराइज्ड पहचान पत्र नहीं है उन्हें वोट डालने से नहीं रोका जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो की ओर से दायर एक अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए दिया है.
अदालत के इस फ़ैसले को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के प्रशासन से सख़्ती से निबटने के एक और क़दम के रूप में देखा जा रहा है, इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि उसने किस आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को देश में आने से रोक रखा है.
इससे पहले अदालत ने एक विपक्षी नेता जावेद हाशमी को भी रिहा कर दिया था जो पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.
बेनज़ीर भुट्टो की अर्ज़ी में कहा गया था कि देश के लगभग तीन करोड़ मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, इस सूची को ठीक कराए बिना निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते.
अर्ज़ी पर सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थापना तभी हो सकती है जब वोटर लिस्ट सही हो, किसी भी नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता.
चुनाव आयोग की तरफ़ से अदालत में हाज़िर हुए अधिकारी ने न्यायाधीश से 140 दिन का समय माँगा था लेकिन अदालत ने कहा कि यह मोहलत बहुत अधिक है.
अर्ज़ी दायर करने वाले वकील लतीफ़ खोसा ने कहा कि वर्ष 2000 की वोटर लिस्ट में दो करोड़ जायज़ वोटरों के नाम नहीं थे जबकि 2000 से अब तक एक करोड़ और लोग बालिग़ हो चुके हैं, इस तरह तीन करोड़ लोग मताधिकार से वंचित हैं.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वकील ने कहा कि एक साज़िश के तहत इन लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.
कड़ा रुख़
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार महमूद चौधरी ने भरोसा दिलाया कि इतनी बड़ी संख्या में वोटरों को मताधिकार से वंचित नहीं होने दिया जा सकता.
इस सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल भी मौजूद थे जिन्होंने अदालत को आश्वस्त दिया कि वे इस सिलसिले में सभी संबद्ध अधिकारियों से बातचीत करेंगे.
अदालत ने एटॉर्नी जनरल को आदेश दिया है कि वे 16 अगस्त इस मामले में हुई प्रगति की रिपोर्ट अदालत में सौंपे.