गुरुवार, 09 अगस्त, 2007 को 02:25 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा में भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हालाँकि पूर्वी भारत और गुजरात में नदियों का जलस्तर घटने से स्थिति सुधरी है.
गुजरात में भारी बारिश से आई अचानक बाढ़ में नौ लोगों को जान चली गई. हालाँकि पिछले चौबीस घंटों के दौरान निचले इलाक़ों में जमा पानी निकलने लगा है.
इसके बावजूद राज्य सरकार ने एहतियाती तौर पर जूनागढ़ के वेरावल शहर में सेना को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.
जूनागढ़ में हज़ारों लोग अचानक आई बाढ़ से विस्थापित हो गए हैं और इनके रहने के लिए अस्थायी शिविर लगाए गए हैं.
महाराष्ट्र में नागपुर से कुछ दूरी पर स्थित एक गाँव में एक दर्जन से अधिक घर बाढ़ में बह गए. लगातार हो रही बारिश के कारण महाराष्ट्र-गोवा सीमा पर भू-स्खलन की घटनाएँ हुई हैं जिससे कोंकण रेलवे रूट पर यातायात भी बाधित हुआ है.
इस बीच बिहार और उत्तरप्रदेश में नदियों का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की साँस ली है.
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया में बाढ़ प्रभावित लोगों को अगर जल्दी राहत सहायता नहीं मिली तो उन्हें महामारी का सामना करना पड़ सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ का कहना है कि रुका हुआ पानी मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का घर है और जल्दी ही ये बीमारियां फैल सकती है.
हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में भोजन, पानी और दवाईयां बांटी गई हैं लेकिन बाढ़ का प्रकोप इतना अधिक है कि राहत कार्य कम पड़ते जा रहे हैं.
भारत में यूनीसेफ के स्वास्थ्य प्रमुख मार्ज़ियो बाबिले का कहना है कि कई गांव अभी भी स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं.
उन्होंने कहा," बाढ़ का रुका हुआ पानी डायरिया और अन्य बीमारियां पैदा करने का स्त्रोत है जो महामारी बन सकती है."
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत में बिहार, असम और उत्तर प्रदेश राज्य सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं जहां प्रभावितों की संख्या दो करोड़ है.
उधर बांग्लादेश में 80 लाख और नेपाल में तीन लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
(बाढ़ के बारे में आप कुछ कहना चाहें या अपने अनुभव बांटना चाहें तो लिखें hindi.lettrs@bbc.co.uk पर )