मंगलवार, 07 अगस्त, 2007 को 08:30 GMT तक के समाचार
संजय दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को टाडा अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की है. उन्होंने अदालत में ज़मानत की अर्ज़ी भी दाखिल की है.
उन्होंने 'प्रोबेशन ऑफ़ ऑफेंडर्स एक्ट' के तहत राहत देने की अर्ज़ी अदालत में दाख़िल की है.
इस क़ानून के तहत अदालत दोषी के गुनाह, चरित्र और परिस्थितियों के आधार पर उसकी सज़ा को आजीवन निलंबित कर सकती है.
ग़ौरतलब है कि मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 'आर्म्स एक्ट' के तहत फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त को छह साल की सज़ा सुनाई थी.
संजय दत्त पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था.
जज पीडी कोडे ने संजय दत्त की ज़मानत अर्जी भी नामंजूर कर दी थी.
इसके बाद संजय दत्त को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें ऑर्थर रोड जेल भेज दिया गया था. बाद में उन्हें पुणे की यरवदा जेल भेज दिया गया था.
अदालत ने संजय दत्त को बम धमाकों की साज़िश रचने के इल्ज़ाम से तो बरी कर दिया था लेकिन उन्हें अवैध तरीके से एक एके-56 राइफ़ल और पिस्तौल रखने का दोषी पाया था.
मुंबई में वर्ष 1993 में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.
मुंबई धमाकों के संबंध में कुल 100 लोगों को दोषी ठहराया गया है. इनमें से 12 को मौत की और 20 को उम्र क़ैद की सज़ा दी गई है.