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सोमवार, 06 अगस्त, 2007 को 10:22 GMT तक के समाचार

राहत सामग्री पहुँचाने में दिक्कत

भारत समेत दक्षिण एशिया के कई अन्य इलाक़ों में बाढ़ की चपेट में आए लोगों को राहत सामग्री पहुँचाने में राहतकर्मियों को ख़ासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत में बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित बिहार राज्य में खाद्य सामग्री को लेकर लोगों की बीच झड़पों की ख़बरें हैं.

ख़बरों के मुताबिक पूर्वी बिहार में राहत सामग्री लेने के चक्कर में एक ग्रामीण की डूबने के कारण मौत हो गई.

एएफ़पी के अनुसार बिहार के आपदा प्रबंधन प्रमुख मनोज श्रीवास्तव ने कहा है कि छह हज़ार से ज़्यादा गाँव बाढ़ की चपेट में है और एक करोड़ 15 लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिनमें से करीब 20 लाख लोग बाहर रहने को मजबूर हैं.

मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि लोगों के बीच झड़पें रोकने के लिए खाद्य सामग्री हैलीकॉप्टरों के ज़रिए गिराई जा रही है.

बाढ़ प्रभावित

बिहार में करीब एक करोड़ 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं जबकि नेपाल, बांग्लादेश और उत्तरी भारत को मिलकार करीब दो करोड़ लोगों पर बाढ़ का असर हुआ है.

बिहार में बाढ़ से अब तक 85 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि उत्तर प्रदेश में मरने वालों की कुल संख्या 153 तक जा पहुँची है.

अभी भी कई ग्रामीण लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुँची है जबकि राहतकर्मियों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद से वे लगातार काम कर रहे हैं.

बिहार के चंपारन ज़िले के भगवान माझी ने स्थानीय टीवी पर कहा," हम घोंघे खाकर जी रहे हैं, हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है."

नेपाल और बिहार में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि बाढ़ के लिए कौन ज़िम्मेदार है.

बिहार में अधिकारियों का आरोप है कि नेपाल ने पानी को रोकने के लिए बाँध नहीं बनाए.

वहीं नेपाल में सांसद पूर्ण कुमारी सुबेदी ने आरोप लगाया है कि भारत ने लक्ष्मणपुर में जो बाँध बनाया है उसके कारण बाढ़ आई है.

वैसे उत्तर भारत में बारिश कम हो गई है पर अधिकारियों का कहना है कि नेपाल से आ रहे पानी के कारण जलस्तर में तुरंत कमी नहीं आएगी.

उत्तर प्रदेश में भी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि हालात जल्द ही बेहतर हो जाएँगे.

उधर असम राज्य में भी नदियों का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब बीमारियों के फैलने की आशंका है.

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि बांग्लादेश में भी करीब दस लाख लोगों की मदद की सख़्त ज़रूरत है.