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शनिवार, 04 अगस्त, 2007 को 12:36 GMT तक के समाचार

संधि परमाणु संप्रभुता पर हमला- भाजपा

भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने अमरीका के साथ असैन्य परमाणु समझौते को 'परमाणु संप्रभुता और विदेश नीति के विकल्पों' पर हमला बताया है.

भाजपा ने शनिवार को परमाणु समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह इस संधि को स्वीकार नहीं कर सकती.

पार्टी ने इस समझौते का अध्ययन करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की माँग की.

जेपीसी की माँग

भाजपा नेताओं यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार को इस संधि पर अगला क़दम तब तक नहीं उठाना चाहिए, जब तक कि जेपीसी अपनी रिपोर्ट न सौंप दे और इसे संसद की मंज़ूरी न मिल जाए.

उन्होंने सरकार से संविधान और क़ानूनों में 'उचित संशोधन' करने की माँग की ताकि देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाले समझौतों के लिए संसद की मंज़ूरी अनिवार्य बन जाए.

शौरी और सिन्हा ने कहा कि भारत-अमरीका परमाणु ऊर्जा क़ानून के 123 मसौदे पर पार्टी की यह प्राथमिक प्रतिक्रिया है. अब वह इस मसौदे का विस्तृत अध्ययन करेगी.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत-अमरीका परमाणु सहमति का मसौदा शुक्रवार को सार्वजनिक किया था.

यशवंत सिन्हा ने कहा कि भाजपा शुरु से ही इस समझौते का विरोध कर रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार यह भ्रम फैला रही है कि इस संधि से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता मिल गई है.

शौरी ने कहा, "हक़ीकत ये है कि इस समझौते के बाद भारत का दर्जा ग़ैर परमाणु हथियार देश के बराबर हो जाएगा."

सहमति

दरअसल, असैनिक मकसदों के लिए 40 साल की अवधि वाली भारत-अमरीका परमाणु सहमति असैनिक गतिविधियों- विशेष तौर पर ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित है. इसके बाद इसे अगले हर दस साल की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा.

इसके तहत भारत असैनिक कार्यों के लिए परमाणु ईंधन और तकनीकी जानकारी अमरीका और परमाणु ईंधन सप्लाई करने वाले देशों से पा सकेगा.

इसके बदले में भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने असैनिक परमाणु केंद्रों का निरीक्षण करने की इजाज़त देनी होगी.

ईंधन का भंडार

जुलाई 2005 के भारत-अमरीका संयुक्त बयान के अनुसार भारत को असैनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रहे रियक्टरों के लिए ईंधन का पूरा आश्वासन दिया गया है.

इस सहमति के तहत दोनो देश परमाणु सामग्री, उपकरण और तकनीक के बारे में जानकारी एक दूसरे को प्रदान कर सकेंगे.

ये भी प्रावधान है कि विशेष तौर पर भारत के लिए परमाणु ईंधन की सप्लाई के बारे में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहमति बनाने में अमरीका भारत के साथ सहयोग करेगा.