बुधवार, 01 अगस्त, 2007 को 04:31 GMT तक के समाचार
सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, रांची
झारखंड के लातेहार ज़िले में माओवादी चरमपंथियों ने दो रेलवे स्टेशनों में धमाके किए हैं और गढ़वा ज़िले में दो बसों को निशाना बनाया है.
रेलवे स्टेशनों पर हुए धमाकों में कोई क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है लेकिन बसों को निशाना बनाने से दोनो बसों के ड्राइवरों को गोली लगी है और एक बस के गढ्ढे में गिर जाने से अनेक यात्री घायल हुए हैं.
इन घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार सीपीआई (माओवादी) संगठन का आरोप है कि इलाज के लिए पटना जा रहे उसके नेता मदनजी पुलिस की हिरासत में है.
हालाँकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन इस संगठन ने बुधवार और गुरुवार को झारखंड बंद का आहवान किया है.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन घटनाओं के ज़रिए सीपीआई (माओवादी) पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव दिखाना चाहता है.
तड़के हुए हमले
हथियारों से लैस, नारे लगाते हुए लगभग 40 माओवादियों ने लातेहार के डेमो और बेंगी रेलवे स्टेशनों पर बुधवार तड़के छापा मारा और धमाके कर दोनो स्टेशनों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया.
इससे पहले उन्होंने डेमो के स्टेशन मैनेजर को बंधक बनाया था लेकिन धमाकों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.
गढ़वा ज़िले के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद निहाल के अनुसार लगभग सात बजे माओवादियों ने गढ़वा ज़िले में एक बस के चालक को निशाना बनाया.
ड्राइवर को गोली लगी और वह बस पर नियंत्रण खौ बैठा और बस एक गढ्ढे में गिर गई जिससे उसमें सवार अनेक यात्री घायल हो गए.
मोहम्मद निहाल के अनुसार इसके बाद एक और बस के ड्राइवर को इसी तरह से निशाना बनाया गया. उन्हें भी गोली लगी लेकिन कोई बस यात्री हताहत नहीं हुआ.
बंद का व्यापक असर
सीपीआई (माओवादी) संगठन का आरोप है कि उसके नेता मदनजी को पुलिस हिरासत में यातनाएँ दी जा रही हैं और इसीलिए बंद बुलाया गया है.
इस पूरे इलाक़े से भारी मात्रा में कोयला देश भर में जाता है लेकिन बंद के कारण रेलगाड़ियों का आना-जाना प्रभावति हुआ है.
लगभग 12 रेलगाड़ियाँ रद्द कर दी गई हैं और बस सेवाएँ भी प्रभावित हुई हैं.
मंडल रेल प्रबंधक एके गुप्ता ने बताया है कि रेलवे को ख़ासा नुकसान हुआ है क्योंकि धमाकों के कारण उस इलाक़े में रेलवे की संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई है.
बंद को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं और ग्रामीण इलाक़ों में ख़ासी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.
चाहे प्रशासन का कहना है कि झारखंड के 22 में से लगभग 18 ज़िले माओवादी हिंसा से प्रभावित हैं लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार हिंसा का प्रभाव पूरे राज्य में देख जा रहा है.