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बुधवार, 01 अगस्त, 2007 को 07:40 GMT तक के समाचार

कोयम्बटूर धमाकों में बाशा दोषी करार

भारत में तमिलनाडु राज्य के कोयम्बटूर शहर में 1998 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में अदालत ने मुख्य अभियुक्त एसए बाशा को दोषी करार दिया है. वे प्रतिबंधित संगठन अल उम्मा के सदस्य थे.

अदालत ने एक अन्य अभियुक्त केरल की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता अब्दुल नासिर मदानी को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

ग़ोरतलब है कि 14 फरवरी 1998 को भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कोयम्बटूर में चुनावी रैली को संबोधित करना था.

उनकी रैली से कुछ ही देर पहले हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 58 मारे गए थे और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

'अल उम्मा ज़िम्मेदार'

पुलिस ने अपनी जाँच में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल उम्मा को धमाकों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था.

इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने प्रतिबंधित संगठन अल उम्मा के एसए बाशा को धमाकों की साज़िश रचने और बम रखने का दोषी पाया.

इस मामले में दोषियों को सज़ा सुनाने की प्रक्रिया छह अगस्त से शुरू होने की उम्मीद है.

उल्लेखनीय है कि इस मामले में 168 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. एक व्यक्ति सरकारी गवाह बन गया जबकि एक अन्य की हिरासत में मौत हो गई.

बाकी 166 के ख़िलाफ़ मुकदमा चला और वे पिछले नौ साल से तमिलनाडु की विभिन्न जेलों में बंद हैं.

'दंगों का बदला'

पुलिस का कहना था कि ये सिलसिलेवार बम धमाके 1997 में नवम्बर-दिसंबर में हुए सांप्रदायिक दंगों की कड़ी थे.

29 नवम्बर 1997 को ट्रैफ़िक कॉंस्टेबल सेल्वराज की हत्या के बाद कोयम्बटूर में दंगे भड़क उठे थे.

इस मामले की जाँच कर रही सीबी-सीआईडी की विशेष टीम ने सेल्वराज की हत्या के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़कने की बात की पुष्टि की थी.

पुलिस का आरोप कहना था कि इन दंगों का बदला लेने के लिए ही अल उम्मा के एसए बाशा, मोहम्मद अंसारी और अन्य ने बम धमाकों की साज़िश रची थी.