सोमवार, 30 जुलाई, 2007 को 02:28 GMT तक के समाचार
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ से माफ़ी मांगने और इस मामले की जाँच से साफ़ इनकार कर दिया है.
दूसरी ओर बंगलौर लौटने के बाद डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ ने कहा है कि वो ऑस्ट्रेलियाई पुलिस के 'उत्पीडन का शिकार' बने जिसके कारण उन्हें गहरे मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा.
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री इस बात से भी सहमत नहीं थे कि भारतीय डॉक्टर का उत्पीड़न किया गया.
हावर्ड ने कहा कि मामला जब 'आतंकवाद' को हो तो सभी सुरक्षित क़दम उठा जाने चाहिए.
हावर्ड ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ऑस्ट्रेलिया डॉक्टर हनीफ से माफ़ी नहीं मांगेगा.
उन्होंने कहा कि हनीफ़ का उत्पीड़न नहीं किया गया और आतंकवाद विरोधी नए क़ानून के कारण देश की साख पर कोई असर नहीं पड़ा है.
ब्रिटेन के नाकाम हमलों के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया में गिरफ़्तार और फिर रिहा हुए डॉक्टर हनीफ़ रविवार को बंगलौर पहुँच गए. वो 27 दिनों तक ऑस्ट्रेलियाई पुलिस की हिरासत में रहे.
बंगलौर हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया. वो भारतीय समयानुसार रविवार रात लगभग साढ़े नौ बजे बंगलौर हवाई अड्डे पर पहुँचे.
डॉक्टर हनीफ़ ने पत्रकारों से कहा कि वे भारत सरकार, मीडिया और अपने समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं.
उनका कहना था,'' परिवार के साथ मिलन काफी भावुक लम्हा है और सदमे से गुजरने के बाद लंबे इंतज़ार के बाद घर लौटना सुखद है.''
हनीफ़ ने कहा, ''मैं यहाँ पहुँचकर काफ़ी खुश हूँ. मैं अपनी बेटी को देखकर राहत महसूस कर रहा हूँ.''
ऑस्ट्रेलिया के एक टेलीविज़न चैनल से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर इनकार किया कि उनके किसी आतंकवादी संगठन से संबंध हैं. साथ ही कहा कि उन्होंने ऐसे किसी संगठन की मदद नहीं की है.
हनीफ़ के ख़िलाफ़ ग्लासगो में कार हमले की साज़िश में जुड़ा मामला सबूतों की समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया था.
मुख्य अभियोजन अधिकारी का कहना था कि हनीफ़ के मामले में उनसे ग़लती हुई.
गिरफ़्तारी फिर रिहाई
पिछले महीने ब्रिटेन में हुए नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को ऑस्ट्रेलिया में उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब वे भारत जाने की तैयारी कर रहे थे.
उनके मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख़ पर भी सवाल उठे थे.
दरअसल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.
डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप लगा कि उन्होंने अपना सिम कार्ड अपने एक रिश्तेदार को दिया था, जो कार बम धमाके के सिलसिले में एक अभियुक्त है.
वहाँ की एक अदालत ने बाद में उन्हें ज़मानत दे दी थी.
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का फ़ैसला किया था. लेकिन बाद में सरकार ने उनके ख़िलाफ़ मामला वापस लेने का निर्णय किया.