रविवार, 29 जुलाई, 2007 को 18:54 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने दक्षिण कोरियाई नागरिकों के अपहरण को शर्मनाक बताते हुए कहा है कि उनकी रिहाई की हर संभव कोशिश हो रही है.
उन्होंने दक्षिण कोरियाई दूत बेक जोंग चुन से मुलाक़ात के बाद यह टिप्पणी की.
करज़ई ने इस घटना को इस्लाम के ख़िलाफ़ बताया है. वहीं अफ़ग़ानिस्तान के मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी इसे पैगंबर मोहम्मद की दीक्षा के विपरीत बताया है.
उधर रोम में पोप बेनेडिक्ट ने भी 22 दक्षिण कोरियाई बंधकों की रिहाई की अपील की है.
इन्हें तालेबान लड़ाकों ने बंधक बनाया हुआ है. तालेबान के एक प्रवक्ता का कहना है कि रिहाई के लिए हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.
अपहरण
तालेबान लड़ाकों ने दक्षिण कोरिया के 23 नागरिकों को ग़ज़नी प्रांत से उस समय अगवा कर लिया था जब वो पिछले गुरुवार को कंधार से काबुल जा रहे थे. बाद में तालेबान ने इनमें से एक की हत्या कर दी.
बाक़ी 22 बंधकों में एक ने बीबीसी को टेलीफ़ोन पर दिए इंटरव्यू में बताया कि वे काफी ख़तरनाक स्थिति में हैं और हालात दिन ब दिन और ख़राब होते जा रहे हैं.
बातचीत के दौरान रो पड़ीं महिला ने अपना नाम वान सू बताया. उनका कहना था कि सभी बंधक बीमार हैं.
दक्षिण कोरिया के वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बंधकों की रिहाई की कोशिश में अफ़ग़ानिस्तान जा रहे हैं.
दक्षिण कोरिया ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है और इसे कभी नहीं भूलने वाली घटना बताया है.
तालेबान की माँग है कि इन नागरिकों को रिहा करने के बदले में जेल में बंद उसके लड़ाकों को छोड़ा जाए और दक्षिण कोरियाई सेना अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाए.