रविवार, 29 जुलाई, 2007 को 16:58 GMT तक के समाचार
बंगलौर लौटने के बाद डॉक्टर हनीफ़ ने कहा है कि उन्हें ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने अपना 'शिकार बनाया'. उन्होंने रिहाई में मदद के लिए समर्थकों का आभार जताया.
ब्रिटेन के नाकाम हमलों के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया में गिरफ़्तार और फिर रिहा हुए डॉक्टर हनीफ़ बंगलौर आ गए हैं. उन्होंने अपने समर्थकों का आभार जताया.
बंगलौर हवाई अड्डा पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया. उनके परिजनों ने कहा कि चरमपंथी गतिविधियाँ हनीफ़ के दिलो दिमाग में कहीं भी नहीं थी.
हनीफ़ काफ़ी खुश नज़र आ रहे थे. वो भारतीय समयानुसार रात लगभग साढ़े नौ बजे बंगलौर हवाई अड्डे पर पहुँचे.
उनके ससुर अशफ़ाक़ अहमद और उनके भाई हवाई अड्डे पर मौजूद थे.
हवाई अड्डे से डॉक्टर हनीफ़ सीधे अपने घर पहुँचे और वहाँ पत्रकारों से सिर्फ़ इतना कहा कि वे भारत सरकार, मीडिया और अपने समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं.
हनीफ़ ने कहा कि उन्हें ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने अपना शिकार बनाया जिसके चलते उन्हें भारी मानसिक वेदना हुई.
इनकार
ऑस्ट्रेलिया के एक टेलीविज़न चैनल से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर इनकार किया कि उनके किसी आतंकवादी संगठन से संबंध हैं. साथ ही कहा कि उन्होंने ऐसे किसी संगठन की मदद नहीं की है.
भारत लौटते समय रास्ते में बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर डॉक्टर हनीफ़ ने संवाददाताओं को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वो ठीक हैं.
डॉक्टर हनीफ़ के वकीलों का कहना है कि वो उनके वीज़ा रद्द करने के ऑस्ट्रेलियाई सरकार के निर्णय को चुनौती देंगे.
डॉक्टर हनीफ़ का वीज़ा रद्द किए जाने के अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केविन एंड्रूज़ ने कहा था कि हनीफ़ शक के दायरे में हैं.
लेकिन ऑस्ट्रेलिया के विपक्षी राजनीतिज्ञों ने डॉक्टर हनीफ़ की गिरफ़्तारी की सार्वजनिक जांच कराए जाने की मांग की है.
डॉक्टर हनीफ़ हमेशा हमले की साज़िश संबंधी कोई भी जानकारी होने से इनकार करते आए हैं.
हनीफ़ के ख़िलाफ़ ग्लासगो में कार हमले की साज़िश में जुड़ा मामला सबूतों की समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया था.
मुख्य अभियोजन अधिकारी का कहना है कि हनीफ़ के मामले में उनसे ग़लती हुई.
मामला
पिछले महीने ब्रिटेन में हुए नाकाम कार बम धमाकों के सिलसिले में डॉक्टर हनीफ़ को दो जुलाई को ऑस्ट्रेलिया में उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब वे भारत जाने की तैयारी कर रहे थे.
उनके मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रुख़ पर भी सवाल उठे थे. दरअसल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.
डॉक्टर हनीफ़ पर आरोप लगा कि उन्होंने अपना सिम कार्ड अपने एक रिश्तेदार को दिया था, जो कार बम धमाके के सिलसिले में एक अभियुक्त है.
वहाँ की एक अदालत ने बाद में उन्हें ज़मानत दे दी थी. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का फ़ैसला किया था. लेकिन बाद में सरकार ने उनके ख़िलाफ़ मामला वापस लेने का निर्णय किया.