शनिवार, 28 जुलाई, 2007 को 03:29 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन ने सभी ग़ैर कश्मीरी मज़दूरों और दस्तकारों को एक हफ़्ते के भीतर जम्मू-कश्मीर से बाहर निकलने को कहा है.
इससे पहले भारत प्रशासित कश्मीर के एक प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने भी कहा था कि ग़ैर कश्मीरी मज़दूरों को राज्य छोड़कर चले जाना चाहिए.
हिज़्बुल के एक प्रवक्ता जुनैदुल इस्लाम ने स्थानीय समाचार एजेंसी सीएनएस से कहा, "बाहरी मज़दूरों और दस्तकारों के ख़िलाफ़ विरोध तभी से बढ़ रहा है जब से उनकी काली करतूतों का पता चला है."
जुनैदुल इस्लाम का कहना है, "उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए यहाँ से चले जाना चाहिए."
हिज़्बुल ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपने-अपने इलाक़ों से ग़ैर कश्मीरी लोगों को बाहर निकाल दें.
हिज़्बुल प्रवक्ता के मुताबिक ऐसा करने से स्थानीय युवा उन गंदगियों से दूर रहेंगे जो ग़ैर कश्मीरी यहाँ फैला रहे हैं.
पिछले हफ़्ते कुपवाड़ा में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी और हिज़्बुल का बयान इसके बाद आया है.
पुलिस का कहना है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल के एक बढ़ई, राजस्थान के एक मोची और दो स्थानीय लोगों ने अपराध क़बूल कर लिया है.
सस्ते मज़दूर
उल्लेखनीय है कि भारत प्रशासित कश्मीर में बिहार, उत्तरप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से हज़ारों लोग हैं जो बढ़ई, राजमिस्त्री, नाई का काम करते हैं और बड़ी संख्या में लोग मज़दूरी करते हैं.
चूँकि कश्मीर के स्थानीय निवासी सरकारी और दूसरी नौकरियों में रुचि लेने लगे हैं इसलिए इस तरह के कामों के लिए दूसरे राज्यों के लोगों की ज़रुरत पड़ने लगी है.
यहाँ तक कि ये लोग सीमा के संवेदनशील इलाक़ों में भी काम कर रहे हैं.
एक ओर तो कश्मीरियों को सस्ते मज़दूर भी चाहिए लेकिन दूसरी ओर उनके भीतर यह डर भी समा रहा है कि इससे कही घाटी की जनसंख्या की तस्वीर न बदल जाए.
इसी तरह की आशंका जताते हुए रेज़ीडेंसी रोड के एक दूकानदार रफ़ी अहमद कहते हैं, "उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और एक दिन ऐसा आएगा जब उनकी संख्या हम कश्मीरियों से अधिक हो जाएगी."
श्रीनगर के आईजी पुलिस एसएम सहाय का कहना है कि यदि गिलानी के बयान से कोई भड़कता है तो इसका दोष उनपर ही होगा.
लेकिन गिलानी की इस अपील से बेख़बर ग़ैर-कश्मीरी मज़दूर अपने कामकाज में लगे हुए हैं.