शुक्रवार, 27 जुलाई, 2007 को 12:44 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस्लामाबाद में लाल मस्जिद के पास हुए बम धमाके में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं.
घटनास्थल का दौरा करके आए बीबीसी संवाददाता का कहना है कि धमाके में कई दूकानें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं.
इस महीने के शुरू में हुई सैनिक कार्रवाई के बाद शुक्रवार को इस मस्जिद को खोला गया था. लेकिन मस्जिद खुलने के बाद जमा लोगों और पुलिस में झड़पें हुईं. लोगों ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
पुलिस को नाराज़ लोगों पर आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. सरकार ने इस मस्जिद के लिए नए इमाम की ख़ुद नियुक्ति की थी लेकिन लोगों ने नए इमाम को मस्जिद में घुसने नहीं दिया.
इस महीने 11 जुलाई को इस मस्जिद में सैनिक कार्रवाई पूरी हुई थी. कार्रवाई के दौरान 102 लोग मारे गए थे, जिनमें 11 सैनिक भी थे. कार्रवाई के दौरान ही लाल मस्जिद के उप प्रमुख अब्दुल रशीद ग़ाज़ी भी मारे गए थे.
शुक्रवार को लाल मस्जिद जब दोबारा खुली तो मदरसे के सैंकड़ों छात्रों ने उस पर क़ब्ज़ा कर लिया सरकार के नियुक्त किए हुए इमाम को नमाज़ पढ़ाने से रोक दिया.
छात्र राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे. उन्होंने पत्रकारों को भी धक्के दे कर मस्जिद से बाहर निकाल दिया.
वे हिरासत में लिए गए तालेबान समर्थक पूर्व इमाम अब्दुल अज़ीज़ को वापस लाने की मांग कर रहे थे. इस्लामाबाद की यह मस्जिद काफ़ी ख़ूनख़राबा देख चुकी है जिसका 11 जुलाई को समापन हो पाया था.
विरोध
सरकार के नियुक्त किए हुए मौलवी मोहम्मद अशफ़ाक़ ने एक समाचार एजेंसी से कहा, "मुझसे कहा गया था कि सब शांतिपूर्ण है. मुझे इस काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी और आज के बाद मैं यह करूँगा भी नहीं".
उन्हें पुलिस की सुरक्षा में बाहर निकाला गया. संवाददाताओं का कहना है कि छात्रों ने मौलाना को मस्जिद में ख़ुतबा देने से रोका और माइक्रोफ़ोन का इस्तेमाल मस्जिद पर धावा बोलने के लिए सरकार को बुरा-भला कहने के लिए किया.
मदरसे के छात्रों और मौलवियों ने इस्लामाबाद में शरिया क़ानून लागू कराए जाने के लिए जब ज़बरदस्त अभियान चलाया था तो सैनिकों को 10 जुलाई को मस्जिद पर धावा बोलना पड़ा था.
मस्जिद को मरम्मत के बाद अब खोला गया है. वहाँ एक नई छत डाली गई और गोलियों से छलनी हुई दीवारों की दोबारा मरम्मत और पुताई हुई.
रावलपिंडी में दयाला जेल के प्रमुख ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मदरसे से पकड़े गए 620 छात्रों में से 567 को रिहा कर दिया गया है. जो अब भी हिरासत में हैं उनमें से तीन लड़कियाँ हैं.
क़ानूनी सहायता प्रदान कराने वाली एक समिति का कहना है कि उसे रिश्तेदारों की ओर से 58 शिकायतें मिली हैं कि मस्जिद पर क़ब्ज़ा करने की घटना के बाद से कुछ लोग अब भी लापता हैं.