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शुक्रवार, 27 जुलाई, 2007 को 13:32 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

बाड़मेर जाति पंचायत का 'तुगलकी फ़रमान'

राजस्थान में पंचायतों के बेतरतीब 'तुगलकी फ़रमानों' का एक और मामला सामने आया है. बाड़मेर ज़िले की एक जाति पंचायत के आदेश के कारण एक विकलांग दम्पती डेढ़ साल के दुधमुँहे बच्चे के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है.

बाड़मेर की घांची बिरादरी के नेमीचंद विकलांग हैं और एक निजी कंपनी में काम करते हैं. दो साल पहले उन्होंने गुजरात की तेजल से शादी की थी. दोनों एक दूसरे को पाकर बहुत खुश थे.

'तुग़लकी फ़रमान'

लेकिन घांची बिरादरी की जाति पंचायत ने नेमीचंद और तेजल की शादी को अमान्य क़रार दे दिया और फिर जाति के कुछ सदस्य हाथ धोकर उनके पीछे पड़ गए. तब से दोनों भय के साए में जीने को मजबूर हैं.

मजबूर नेमीचंद न तो अपने घर जा पा रहा है और न ही परिवारजनों से मिल पा रहा है. तेजल भी अपनी सास से मिलने को उत्सुक हैं लेकिन वे ऐसा न मिल पाने का गम साल रहा है. फिलहाल यह पति-पत्नी गुजरात में अहमदाबाद में रह रहे हैं.

नेमीचंद ने अपना दुख बयान करते हुए बताया, "मेरे पिता इस मामले में गत 21 अप्रैल को पंचायत के सामने पेश होने के लिए जाते वक़्त सड़क हादसे में मारे गए थे. लेकिन पंचायत ने मुझसे मेरे ही पिता का अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार छीन लिया."

उधर नेमीचंद के पक्ष में आवाज़ उठाने वाले बाड़मेर के सामाजिक कार्यकर्ता गोकाराम भाटी को भी जाति पंचायत ने बिरादरी से बाहर कर दिया है.

गोकाराम ने बताया कि पंचायत के समक्ष उनकी 19 जुलाई को पेशी हुई थी जिसमें उन्हें डेढ़ घंटे तक धूप में खड़े रखा गया. डेढ़ लाख जुर्माना भरने के बावजूद अब तक उनका बहिष्कार खत्म नहीं हुआ है.

गोकाराम ने पंचायत के ख़िलाफ थाने में मामला दर्ज कराया था. बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक नितिनदीप ने बताया "हम दोनों ही मामलों की जांच कर रहे हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा".

पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज़ की कविता श्रीवास्तव ने सरकार से पंचायत के विरूद्ध कार्रवाई करने की माँग की है. उन्होंने पंचायत के ख़िलाफ़ अदालत में एक याचिका भी दायर की है जिसपर सुनवाई होना बाक़ी है.