गुरुवार, 26 जुलाई, 2007 को 23:26 GMT तक के समाचार
आलोक प्रकाश पुतुल
बिलासपुर से
एपीजे कलाम की राष्ट्रपति पद से विदाई के साथ ही गाँवों को अत्याधुनिक शहरों जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की उनकी ‘पुरा’ योजना के भविष्य को लेकर अटकलें लगनी शुरु हो गई हैं.
राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने पिछले साल नवंबर में छत्तीसगढ़ के जिन 22 गांवों को मिलाकर ‘पुरा’ गांव की आधारशिला रखी थी, उनमें अब तक कोई काम शुरु नहीं हो पाया है.
अब इन गांवों के लोग मानने लगे हैं कि ‘पुरा’ योजना को लेकर जो सपना एपीजे कलाम ने देखा था, उस पर शायद ही अमल हो.
सरकारी अमला भी ‘पुरा’ योजना में बजट का हवाला दे कर अपना हाथ खिंचता नज़र आ रहा है.
‘पुरा’ योजना यानी 'प्रोवाइडिंग अरबन सर्विसेस इन रुरल एरियाज़' असल में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के विजन 2020 का हिस्सा है.
इस योजना के तहत कुछ गाँवों का एक समूह बना कर उनमें अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना थी. देश भर में इस तरह के कम से कम सात हज़ार 'पुरा' गांव बसाने की योजना थी.
'पुरा' में सब अधूरा
छत्तीसगढ़ के बकतरा समेत 22 गांवों में पिछले साल नवंबर में जब तत्कालीन राष्ट्रपति कलाम ने ‘पुरा’ योजना की आधारशिला रखी थी, तब गांव वालों को बताया गया था कि इन गांवों में बैटरी चलित वाहन होंगे, राष्ट्रीय स्तर का अत्याधुनिक अस्पताल होगा और मोबाइल क्लिनिक की व्यवस्था होगी.
इन सभी 22 गांवों में सौ फ़ीसदी साक्षरता की योजना थी.
इसके अलावा दावा किया गया था कि कम से कम गाँव के 50 फ़ीसदी लोगों के पास रोज़गार होगा और अत्याधुनिक संचार के माध्यम सामान्यजन के लिए उपलब्ध होंगे.
इन 22 गांवों के चारों ओर 37 किलोमीटर रिंग रोड बनाने की योजना भी बनाई गई थी.
लेकिन एक सरकारी बस सेवा शुरु करने के अलावा इस दिशा में कोई काम नहीं हो पाया.
हालत ये है कि अब तक इस ‘पुरा’ योजना का मास्टर प्लान ही नहीं बन पाया है. 120 करोड़ की योजना के लिए केवल एक करोड़ रुपए मिले हैं और अफ़सर तय नहीं कर पा रहे हैं कि इस एक करोड़ रुपए से क्या किया जाए.
इस योजना के लिए जापान बैंक इंटरनेशनल कारपोरेशन से कर्ज लेने की भी कोशिश की गई. आरंभिक तौर पर बैंक के अधिकारियों ने ‘पुरा’ योजना के लिए चयनित गांवों का दौरा भी किया लेकिन इसके बाद बैंक भी चुप्पी साध गया.
केंद्र-राज्य विवाद
‘पुरा’ योजना के नोडल अधिकारी आलोक अवस्थी कहते हैं- " हम 'पुरा' क्षेत्र के लिए चयनित गाँव वालों की एक बैठक बुलाने वाले हैं, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्राथमिकता के आधार पर वे कौन से दो काम कराना चाहते हैं. इन इलाकों में हम सर्वे भी करवा रहे हैं."
राज्य सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि इस योजना को लेकर केंद्र सरकार शुरु से उदासीन है. यहां तक कि योजना आयोग ने तो ‘पुरा’ योजना के लिए पैसे देने से ही मना कर दिया है.
लेकिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का कहना है कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण अब तक ‘पुरा’ योजना का काम आगे नहीं बढ़ पाया है.
उनका दावा है कि राज्य की भाजपा सरकार ने ‘पुरा’ योजना में भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग नौ महीने का समय ज़ाया कर दिया. अब जब सरकार की असफलता सामने आ गई है तो वह अपना दोष केंद्र के मत्थे मढ़ रही है.
‘पुरा’ योजना अगर आने वाले दिनों में केंद्र-राज्य विवाद में उलझकर रह जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
‘पुरा’ योजना में शामिल कुरुद गाँव के अशोक कुमार कहते हैं- “कलाम साहब होते तो शायद पुरा का काम पूरा हो पाता, लेकिन अब उम्मीद नहीं है. साल भर में कुछ हुआ नहीं और अब तो किसी का भरोसा भी नहीं है. ”