बुधवार, 25 जुलाई, 2007 को 07:59 GMT तक के समाचार
1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के लिए विशेष टाडा अदालत ने बुधवार को फाँसी की सज़ा सुनाई है.
अदालत ने पहली बार किसी को एक से अधिक फाँसी की सज़ा सुनाते हुए पाँच फाँसियों की सज़ा सुनाई है.
उन पर एयर इंडिया भवन और शिवसेना भवन में बम रखने का दोषी पाया गया था.
इसके साथ ही कुल 11 लोगों को फाँसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है.
इसके बाद अब सिर्फ़ आठ लोगों को सज़ा सुनाया जाना शेष है, जिसमें मेमन परिवार के चार सदस्य और फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त शामिल हैं.
विशेष टाडा अदालत ने मुंबई बम कांड के मामले में कुल सौ लोगों को दोषी पाया था.
इनमें से 92 लोगों को सज़ा सुनाई जा चुकी है. 10 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है और 16 को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
पाकिस्तान से प्रशिक्षण
बुधवार को फ़ारुक़ पावले को मौत की सज़ा सुनाई गई है.
इस मामले के सरकारी वकील उज्जवल निकम ने सज़ा सुनाए जाने के बाद पत्रकारों को बताया कि फ़ारुक़ पावले को शिवसेना भवन में एक आरडीएक्स से भरी हुई कार रखने का दोषी पाया गया था.
इस कार बम के फटने से चार लोगों की मौत हुई थी और 50 अन्य घायल हुए थे.
इसी तरह फ़ारुक़ ने एयरइंडिया भवन में भी बम रखा था जिससे 20 लोग मारे गए थे और 36 अन्य घायल हुए थे.
सरकारी वकील निकम ने बताया कि अदालत ने फ़ारुक़ को पाकिस्तान जाकर बम बनाने और हैंडग्रेनेड फेंकने का प्रशिक्षण लेने का भी दोषी पाया.
अदालत ने कहा है कि फ़ारुक़ ने इरफ़ान और सलीम नाम के दो व्यक्तियों के साथ जाकर विस्फोट के पहले एयरइंडिया भवन और टाइम्स ऑफ़ इंडिया भवन का जायज़ा लिया था और बम रखने की तैयारियाँ की थीं.
बम धमाके
1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.
माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे.
माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अब भी फ़रार हैं.
भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.
मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 वर्षों से जेल में हैं.
यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती.