मंगलवार, 24 जुलाई, 2007 को 08:21 GMT तक के समाचार
विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के लिए मंगलवार को तीन और व्यक्तियों को फाँसी की सज़ा सुनाई है.
इसके साथ ही कुल 10 लोगों को फाँसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है.
अदालत ने एक व्यक्ति को तिहरे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है. इस मामले में तिहरे आजीवन कारावास का यह पहला मामला है.
इसके बाद अब सिर्फ़ नौ लोगों को सज़ा सुनाया जाना शेष है, जिसमें मेमन परिवार के सदस्य और फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त शामिल हैं.
विशेष टाडा अदालत ने मुंबई बम कांड के मामले में कुल सौ लोगों को दोषी पाया था.
इनमें से 91 लोगों को सज़ा सुनाई जा चुकी है. 10 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है और 17 को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
तीन को मौत की सज़ा
मुंबई बम कांड मामले में सरकारी वकील उज्जवल निकम ने पत्रकारों को बताया कि मंगलवार को जिन तीन लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है उनमें ज़ाकिर शेख़, अब्दुल ख़ान और फ़िरोज़ मलिक हैं.
इन तीनों पर माहिम के मछुआरा बस्ती में बम फेंकने का आरोप साबित हुआ है.
सरकारी वकील के अनुसार अदालत ने मोइन क़ुरैशी को तिहरे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
अदालत ने कहा है कि मोइन क़ुरैशी का दोष भी गंभीर है लेकिन अदालत मानती है कि कम उम्र का होने के कारण, हो सकता है कि उन्हें बहकाया गया होगा, इसलिए उन्हें मौत की सज़ा नहीं दी जा रही है.
बम धमाके
1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.
माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे.
माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अब भी फ़रार हैं.
भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.
मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 वर्षों से जेल में हैं.
यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती.